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उदासीनता : विद्यापतिधाम को कब मिलेगा पर्यटनस्थल का दर्जा
Doorbeen News Desk: कवि कोकिल विद्यापति की समाधि भूमि विद्यापतिधाम पर्यटन स्थल का दर्जा हासिल करने की बाट जोह रहा है। कवि परंपरा को जीवित रखने वाले गणेश गिरि कवि कहते हैं कि मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति ने कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को इसी पावन भूमि में महानिर्वाण प्राप्त किया था।
यहां पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पूरे विद्यापति प्रखंड में एकमात्र ‘विद्यापति इंटर कालेज’ की मान्यता आठ वर्ष पहले समाप्त कर दी गई। वर्तमान सांसद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसके लिये प्रयास किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। विद्यापतिधाम में पूजा- अर्चना कराने वाले हरिओम गिरि ने कहा कि यह क्षेत्र ज्ञान की भूमि रही है जहां वेद, संस्कृत भी पल्लवित होती रही है। बीते वर्षों में क्षेत्र का विकास भी हुआ है लेकिन ज्ञान परंपरा से जुड़े संस्कृत एवं वेद पाठशालाएं यहां नहीं हैं।

संस्कृत एवं वेद शिक्षा के लिये बच्चों को वाराणसी एवं अन्य स्थानों पर भेजना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां संस्कृत एवं वैदिक शिक्षा के लिये संस्थान स्थापित करेंगे। क्षेत्र के लोग लंबे समय से विद्यापतिनगर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। विद्यापतिधाम मंदिर के कोषाध्यक्ष रत्न शंकर भारद्वाज का कहना है कि यह महान कवि विद्यापति की निर्वाण भूमि है, जो साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

यह कामना लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और यहां विद्यापति के साथ शिव पार्वती की पूजा होती है। यह स्थान रेलमार्ग (विद्यापतिधाम स्टेशन) और सड़क मार्ग से जुड़ा है और प्रशासन द्वारा वार्षिक महोत्सव किए जाते हैं, लेकिन पूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में आधिकारिक घोषणा लंबित है। सावन और अन्य अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु (नेपाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बंगाल से भी) आते है। लेकिन इसे पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद इलाके में विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
पूर्व में यह बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के नाम से प्रसिद्ध है। किंवदंति है कि विद्यापति के आह्वान पर मां गंगा स्वयं यहां पहुंची तथा उन्हें कार्तिक धवल त्रयोदशी को अपने अंक में समेटते हुए लौट गयी थी। किंवदंतियों के मुताबिक यहां स्वयं भगवान शिव कवि कोकिल विद्यापति की भक्ति भावना से प्रसन्न होकर विराजमान हुए थे।
यहां से मात्र पांच किलोमीटर दक्षिणवर्ती इलाके में गंगा नदी है, जहां चौमथ (चमथा) घाट पर राजा जनक के स्नान करने आने का उल्लेख भी ग्रंथों में मिलता है। विद्यापतिनगर (विद्यापतिधाम) आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है और पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है, पर अभी तक इस दिशा में पूर्ण दर्जा नहीं मिलने से लोगो में मायूसी है।






