समस्तीपुर, दरभंगा व मधुबनी जिले के हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर पर नहीं रहते कर्मी, आरडीडी ने सभी सिविल सर्जन को दी हिदायत

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समस्तीपुर। समस्तीपुर सहित दरभंगा व मधुबनी जिले में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कर्मियों की लापरवाही से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। जिसके कारण लोगों को सेंटर से बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। लोगों की शिकायत के बाद दरभंगा प्रमंडल के क्षेत्रीय अपर निदेशक ने इसे गंभीरता से लेते हुए समस्तीपुर सहित दरभंगा व मधुबनी के सीएस को पत्र जारी करते हुए सेवा को सुनिश्चित करते हुए नियमित रुप से निगरानी करने का आदेश दिया है। साथ ही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सफल संचालन को लेकर विशेष हिदायत दी गयी है। आरडीडी के द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि दरभंगा प्रमंडल के सभी जिला से दूरभाष पर आम लोगों की शिकायत मिल रही है। जिसमें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर समय से नहीं खुलने एवं एचडब्ल्यूसी पर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता हे।

जिन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर राज्य से बाहर के सीएचओ की पदस्थापना है, वो कई दिनों तक तक लगातार अपने ड्यूटी से गायब मिलते हैं। वहीं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक व बीसीएम के स्तर से हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण कार्य भी संपादित नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण पीएचसी प्रभारी, बीएचएम व बीसीएम की मिली भगत से ऐसा हो रहा है। इस पर आरडीडी से गंभीर खेद व्यक्त किया है।

आरडीडी ने समस्तीपुर, दरभंगा व मधुबनी के सीएस को निर्देश देते हुए कहा है कि अपने-अपने जिला अंतर्गत सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर दी जानी वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का समय-समय पर जिला स्तरीय अधिकारी से मॉनिटरिंग कराना सुनिश्चित करें। साथ ही रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक महीना कार्यों की मासिक समीक्षा करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए सूचित करने का आदेश दिया है।

समस्तीपुर जिले में फिलहाल 351 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। इसमें से 140 सेंटरों पर सीएचओ की पोस्टिंग की गयी है। जिसमें लगभग 80 सेंटरों पर कार्यरत सीएचओ राजस्थान, यूपी एवं अन्य परदेश के हैं। जबकि अन्य केंद्रों पर जीएनएम को ही सीएचओ का प्रभार दिया गया है। किसी भी केंद्र पर अगर कोई कर्मी या अधिकारी 15 दिनों तक लगातार बिना किसी सूचना के गायब रहते हैं तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए संबंधित संस्थान के प्रभारी द्वारा वरीय अधिकारियों को सूचित किया जाता है। फिर गायब कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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