सदर अस्पताल की कुव्यवस्था पर भाकपा माले की कार्रवाई की मांग, सदर अस्पताल की कुव्यवस्था एवं भ्रष्टाचार के लिए सिविल सर्जन जिम्मेवार

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर, 18 सितंबर 2026: सदर अस्पताल में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कथित लापरवाही तथा इमरजेंसी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के मामले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को एक महिला पुलिसकर्मी की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किए जाने के बाद जांच का आदेश दिया गया है, लेकिन आम लोगों में अस्पताल की व्यवस्था में सुधार को लेकर संदेह बना हुआ है।

भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि सदर अस्पताल के इमरजेंसी, गायनिक, ओपीडी समेत विभिन्न विभागों में तैनात चिकित्सक एवं कर्मी अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। गंभीर मामला आने पर तैनात कर्मी द्वारा फोन कर चिकित्सक को बुलाया जाता है। कई बार तब तक मामला बिगड़ चुका होता है।

उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में टालमटोल की जाती है, जांच प्रक्रियाओं में मनमानी होती है तथा थाना को सूचना देने एवं फर्द बयान लेने के नाम पर भी पैसे की मांग किए जाने की शिकायतें भी मिलती रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में मरीजों को जानबूझकर निजी क्लीनिकों में रेफर कर दिया जाता है। करीब करोड़ रुपए खर्च कर बनाया गया आक्सीजन प्लांट बंद है। चर्चानुसार प्लांट में जबरदस्त घूसखोरी के कारण प्लांट का ये हाल है। यहां तक कि जिलाधिकारी एवं अनुमंडलाधिकारी के निर्देशों की भी अनदेखी की जाती है।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि शुक्रवार तड़के पुलिस लाइन में पेट दर्द की शिकायत के बाद एक महिला पुलिसकर्मी मालती कुमारी को सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि उस समय चिकित्सक,

स्वास्थ्यकर्मी तथा आईसीयू कर्मियों के अनुपस्थित रहने और लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण महिला पुलिसकर्मी की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार पीड़ित स्वयं पुलिस विभाग की कर्मी थीं, जिसके कारण मामला व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

माले नेता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों और कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप तय कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

*प्रो हरिमोहन झा की जयंती पर ‘हरिमोहन झाक कथाक प्रासंगिकता’ विषयक संगोष्ठी आयोजित – Doorbeen News*

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