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Samastipur News: कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान (कुसुम सदन) के प्रांगण में रविवार को भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जो देर शाम तक साहित्यिक रसधारा से सराबोर रहा। इस आयोजन में दूर-दराज से बड़ी संख्या में रचनाकारों ने भाग लिया और अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राम सूरत प्रियदर्शी द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। इसके बाद संस्थान के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने हिंदी साहित्य के महान हस्ताक्षरों—
केदार नाथ अग्रवाल, माखनलाल चतुर्वेदी, राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध तथा हसरत जयपुरी समेत अन्य साहित्यकारों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही महान स्वतंत्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह को भी याद किया गया।


विशिष्ट अतिथियों की रही गरिमामय उपस्थिति:
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व राजभाषा अधिकारी भुवनेश्वर मिश्र ने की, जबकि संचालन सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार प्रवीण कुमार चुन्नू ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में ग़ज़लकार नरेंद्र कुमार सिंह त्यागी की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया।
इस दौरान तेज नारायण सिंह ‘तपन’ की नई कृति “गुलदस्ता” का सामूहिक लोकार्पण भी किया गया।
विविध विधाओं ने बांधा समां:
गोष्ठी में रोमांटिक गीत, भजन, ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य के साथ भोजपुरी, मैथिली और बज्जिका भाषाओं की रचनाएं प्रस्तुत की गईं, जो श्रोताओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।
मंच पर शिक्षाविद राज कुमार राय ‘राजेश’, रामाश्रय राय ‘राकेश’, स्मृति झा, दीपक कुमार श्रीवास्तव, विष्णु कुमार केडिया, रंजना लता सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।


पसंद की गई कुछ पंक्तियां:
“सोना का संसार चमकता, कवि को लगता मिट्टी की ढेरी…” — शिवेंद्र कुमार पाण्डेय
“कांटों से भरी शाख पर खिलता गुलाब है…” — राज कुमार राय ‘राजेश’
“धूप में क्यों आ गई हो…” — प्रवीण कुमार चुन्नू
“जिंदगी में कुछ लोग ऐसे मिले…” — भुवनेश्वर मिश्र
“जीवन को ऐसे जियो, जैसे फूल गुलाब…” — तेज नारायण सिंह ‘तपन’
“काम छोटा बड़ा नहीं होता…” — दीपक कुमार श्रीवास्तव
धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन कुमारी शैलजा कनिष्ठा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।


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