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बिहार के अस्पतालों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए नोडल अधिकारी तैनात होंगे
Doorbeen News Desk: राज्य के सभी अस्पतालों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए नोडल अधिकारी तैनात होंगे। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल परिसर में कोई आवारा कुत्ता प्रवेश नहीं कर सके। इसके लिए आवश्यक इंतजाम करेंगे। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को दिशा-निर्देश जारी किया है। विभाग ने विस्तार से बताया है कि कौन-कौन सी व्यवस्था इसको लेकर करनी है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के हर स्तर के अस्पतालों में चहारदिवारी और गेट की सुविधा सुनिश्चित होनी चाहिए। ताकि, आवारा कुत्तों को परिसर में आनने से रोका जा सके। कुत्तों के आंतक से मरीजों और परिजनों को बचाने तथा सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में आये फैसले को देखते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। जिलों को यह भी कहा गया है कि अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते दिखे तो संबंधित पदाधिकारी इसके लिए दोषी माने जाएंगे।

नोडल पदाधिकारी नगर निकायों और ग्राम पंचायतों से संपर्क में रहेंगे : विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोडल पदाधिकारी परिसर के रखरखाव और सफाई के लिए जिम्मेदार हों। नोडल अधिकारी की विवरणी प्रवेश द्वार पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाये। नोडल पदाधिकारी संबंधित नगर निकायों और ग्राम पंचायतों से संपर्क में रहेंगे।
एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता जरूरी: जिलों को यह भी सख्त हिदायत दी गई है कि सभा अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता रहे। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारी बताते हैं कि वर्तमान में राज्य के अस्पतालों में 12 लाख दस हजार वैक्सीन की उपलब्धता है।

हर अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध करायी गयी है। अस्पतालों में जैविक चिकित्सीय अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट का बेहतर ढंग से निष्पादित करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि कुत्ते उसके प्रति आकर्षित होकर परिसर में प्रवेश करें। राज्य स्वास्थ्य समिति से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में हर महीने 25 हजार से अधिक लोगों को आवारा कुत्ते काट रहे हैं।






