शिवाजीनगर में जलवायु अनुकूल खेती पर किसान गोष्ठी, वैज्ञानिकों ने बताए तकनीकी बदलाव के उपाय

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शिवाजीनगर में जलवायु अनुकूल खेती पर किसान गोष्ठी, वैज्ञानिकों ने बताए तकनीकी बदलाव के उपाय

Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सोमवार को किसानों को बदलते जलवायु परिदृश्य में खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक, आत्मा समस्तीपुर के आदेशानुसार आत्मा योजना के अंतर्गत कैफेटेरिया ऑफ एक्टिविटी के तहत जलवायु अनुकूल कृषि एवं समसामयिक विषय पर क्षेत्र दिवस सह किसान गोष्ठी का आयोजन प्रखंड के दहियार रन्ना पंचायत स्थित धोबियाही गांव के ब्रह्मस्थान परिसर में किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से किसान शामिल हुए और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलते जलवायु के कारण खेती पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराना तथा उससे निपटने के लिए खेती में आवश्यक तकनीकी बदलावों की जानकारी देना था। उद्घाटन पंचायत के मुखिया पति राजेश कुमार सिंह एवं पंचायत समिति सदस्य मदनेश्वर झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

उद्घाटन के दौरान जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है और किसान यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो उत्पादन के साथ-साथ लागत में भी कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम का मंच संचालन आत्मा के सहायक तकनीकी प्रबंधक अमरदीप शर्मा ने किया। उन्होंने आत्मा योजना के उद्देश्यों और किसानों के लिए उपलब्ध विभिन्न प्रशिक्षण एवं सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आत्मा योजना का लक्ष्य किसानों को नई तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है।

कृषि विज्ञान केंद्र, लादा से आए कृषि वैज्ञानिक जोगेंद्र सोरेन ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, तापमान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने तनावरोधी किस्मों के चयन पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी किस्में कम पानी और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन देती हैं।
उन्होंने फसल चक्र अपनाने, बहुफसली एवं अंतरवर्तीय फसल पद्धति को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जोखिम भी कम होता है।

साथ ही उन्होंने समय-समय पर खेत की मिट्टी जांच कराने को आवश्यक बताया ताकि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किया जा सके। कृषि वैज्ञानिक ने स्प्रे के लिए ड्रोन तकनीक, जीरो टिलेज विधि से बुआई और ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से पानी, समय और श्रम की बचत होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। कार्यक्रम में कृषि समन्वयक कैलाश सहनी ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि योजनाओं और उन पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी किसानों को दी। उन्होंने ई-केवाईसी की अनिवार्यता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उसके आर्थिक लाभ पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। गोष्ठी के दौरान किसानों ने भी अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए।

वैज्ञानिकों और कृषि पदाधिकारियों ने किसानों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने इस तरह के आयोजनों को बेहद उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, आत्मा कर्मी, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने और आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया है।

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