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सकरी, रैयाम और मोतीपुर चीनी मिलें सहकारिता मॉडल से चलेंगी
Doorbeen News Desk: बिहार राज्य में सहकारिता क्षेत्र की मदद से तीन चीनी मिलें लगाई जाएंगी। इसकी संभावना तलाशी जा रही हैं। इसके लिए बंद पड़ी मिलों की जमीन और अन्य संसाधन का सर्वे कर डीपीआर बनाई जाएगी। इसके लिए पुणे स्थित शुगर इंस्टीट्यूट से संपर्क किया जा रहा है।
पहले चरण में मधुबनी जिले की सकरी, दरभंगा की रैयाम और मुजफ्फरपुर की मोतीपुर मिल को सहकारिता मॉडल से चलाने का निर्णय लिया है। मोतीपुर चीनी मिल की जमीन को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है। इसलिए सबसे पहले सकरी और रैयाम का सर्वे होगा। इसके लिए पुणे के बसंत बाबा शुगर इंस्टीट्यूट से संपर्क किया जा रहा है। शोध संस्थान की मदद से बिहार में सहकारिता मॉडल का अध्ययन करने के साथ ही डीपीआर भी बनाई जाएगी।

इन तीनों जगहों पर वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों की पुरानी मशीन की जगह आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। चीनी के अलावा यहां इसके अन्य उत्पाद का भी उत्पादन किया जाएगा। इसमें इथेनॉल और बायो फर्टिलाइजर शामिल है। इसके लिए यहां मशीन लगाई जाएगी। बता दें कि विधानसभा चुनाव के समय एनडीए सरकार ने बंद चीनी मिलों को चालू करने का निर्णय लिया था। नीतीश सरकार बनने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने भी इसकी मंजूरी दी थी।

बाद में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस संबंध में टास्क सौंपा था। अभी वहां सहकारिता क्षेत्र से 101 चीनी मिलें संचालित हो रही है। इसी को बिहार में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सहकारिता विभाग को पहले चरण में सकरी, रैयाम और मोतीपुर चीनी मिल चालू करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।






