समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले में नशीली दवा एवं प्रतिबंधित दवाओं पर शिकंजा कसने को लेकर जिला प्रशाशन एवं औषधी नियंत्रण विभाग ने फिर से तैयारी शुरु कर दी है। ताकि ऐसे प्रतिबंधित एवं नशीली दवाओं के क्रय विक्रय पर पूरी तरह रोक लायी जा सके। इसको लेकर अब प्रत्येक दवा दुकानों की निगरानी सीसीटीवी से की जाएगी। यूं कहें तो सीसीटीवी की निगरानी में ही दवा दुकानदार अब किसी भी प्रकार की दवा को बेच सकते हैं। अन्यथा उनके विरुद्ध कारवाई भी हो सकती है। विदित को दवा दुकानों से प्रतिबंधित दवाओं एवं नशीली दवाओं के बेचने पर पूरी तरह शिकंजा कसने के लिए सरकार ने निर्देश जारी किया है।
इसको लेकर डीएम ने औषधी नियंत्रण प्रशासन को दिशा निर्देश जारी किया है। जिसमें प्रत्येक दवा दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का निर्देश संबंधित दुकानदारों को देने को कहा गया है।


इसको देखते हुए औषधी नियंत्रण प्रशासन के एडीसी निलीमा कुमारी ने बताया कि सभी दवा दूकानों में सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य है। इसको लेकर मेडिकल ड्रग्स एसोसिएशन से भी सीसीटीवी युक्त दुकानों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही संघ को अपने माध्यम से भी सभी दुकानदारों को सीसीटीवी कैमरा लगवाने की अपील की गयी है। सरकार के द्वारा जारी गाइड लाइन व निर्देश का पालन किया जा सके। एडीसी निलीमा कुमारी ने कहा कि जिले में सभी दवा दुकानों की जांच जारी है। इसके तहत अब सभी डीआई को यह निर्देश दिया गया है कि दवा दुकानों की जांच के दौरान तैयार किए गए रिपोर्ट में सीसीटीवी कैमरा होने या नहीं होने की भी जानकारी अंकित करनी है। ताकि यह पता चल सकें कि किस-किस क्षेत्र में ऐसे कितने दवा दुकान हैं, जहां सीसीटीवी लगे हैं या नहीं।


सीसीटीवी कैमरे लगाने के बाद प्रतिबंतिध एवं नशीली दवा को खरीदने वाले का ट्रैक किया जाएगा। कई ऐसी दवाएं हैं जो केवल मेडिकल पर्ची के आधार पर ही देनी हैं, जिसकी पूरी जानकारी दुकानदार को भी रखनी है। इसके बावजूद ऐसी दवाओं को बिना पर्ची के आधार पर बेची जाती है। जिसे किशोर व युवा वर्ग नशे के रुप में प्रयोग करते हैं। कैमरा लगाने के बाद ऐसे लोगों की ट्रैकिंग की जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार शेड्यूल एच में 536 और एच में 46 दवाएं शामिल हैं। इन्हें बिना डॉक्टर के पर्चे के फार्मासिस्ट को नहीं बेचना है। शेड्यूल एक्स दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी है। इसकी कॉपी विक्रेता को दो सालों तक संभालकर रखनी होती है। ऐसी दवाओं का सेवन युवा नशे के तौर पर कर रहे हैं। वहीं, शेड्यूल एक्स नारकोटिक और साइक्लोक्रोटिक्स दवाएं आती हैं, जो अत्यंत प्रभावी और नशीली भी होती हैं।


ये दवाएं सीधे दिमाग पर प्रभाव करती हैं, जिसके चलते गलत खुराक व ओवेरडोज के कारण यह घातक भी साबित हो सकती है। शहर से लेकर गांव तक नशीली दवाओं का प्रयोग काफी बढ़ गया है। सूत्रों की मानें तो कुछ दुकानदार अधिक मुनाफा के चक्कर में अधिक किमत लेकर किशोर एवं युवाओं को नशे की टैबलेट, इंजेक्शन आदि बेचता है। समस्तीपुर शहर में भी कई चौक- चौराहों पर भी ऐसी दवाएं बेची जाती है। यह दवा पान दुकान एवं चाय-नाश्ते की दुकान तक भी में उपलब्ध होने लगी है। जिसका सेवन किशोर व युवाओं के द्वारा किया जाता है।





