रोसड़ा में मछली मारने को लेकर विवाद ने पकड़ा तूल, आक्रोशित लोगों ने किया एसएच 88 को किया जाम, जाम में फंसे सैकड़ों वाहन

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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के रोसड़ा महिषर चौर के सरहुल्ला बाहा में शिकारमाही (मछ्ली मारने ) को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तूल पकड़ लिया। जिसके कारण मंगलवार की दोपहर बाद शिकारमाही विवाद को लेकर भिरहा गांव से सैकड़ों लोग हॉस्पीटल चौक पहुंच गए। इसके बाद अस्पताल के समीप धरना देकर एसएच 88 को जाम कर दिया। सड़क जाम के कारण सड़क पर दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गई। जिसके कारण सैकड़ो वहां जाम में फंसे रहे। वहीं छोटे-मोटे वहां अन्य रास्ते से अपने गंतव्य स्थान की ओर रवाना हुए। आक्रोशित लोग प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान आक्रोशित लोग अनुमंडल प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोशित थे।

हंगामा व सड़क जाम कर रहे लोगों को समझाने-बुझाने पहुंचे रोसड़ा सीओ व बीडीओ को भी आक्रोशित लोगों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा। बताया जाता है कि सीओ व बीडीओ का वाहन जैसे ही जामस्थल के समीप पहुंचा लोगों का उबाल फूट पड़ा। इस दौरान भीड़ में शामिल कतिपय उपद्रवियों द्वारा सीओ के वाहन पर रोड़ेबाजी करने की भी सूचना है। जिससे आंशिक रूप से सीओ का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया। माहौल बिगड़ता देख सीओ व बीडीओ वहां से निकल जाने में भी अपनी भलाई समझे। इधर, सूचना पर पहुंची रोसड़ा पुलिस भी जामस्थल के समीप पहुंची, पर माहौल को देखते हुए पुलिस वाहन भी जामस्थल से एक किलोमीटर पीछे खड़ी रही।

इस दौरान शिवाजीनगर पुलिस व विभूतिपुर पुलिस भी जामस्थल के समीप पहुंची, लेकिन जामस्थल पर माहौल को देख पुलिस जामस्थल से दूर ही खड़ी थी। उग्र लोगों का कहना था कि शिकारमाही को लेकर बीते सोमवार को अनुमंडल कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ दो पक्षों के बीच वार्ता हुई थी। वार्ता में स्लुईस गेट उठाने की सहमति बनी। जब मंगलवार को प्रशासन के द्वारा स्लुईस गेट उठाया गया तो द्वितीय पक्ष के द्वारा जाल लगाकर शिकारमाही जारी रखा गया। जबकि द्वितीय पक्ष के द्वारा की जा रही शिकारमाही को लेकर ही रोक लगाने की गुहार प्रशासन से लगायी थी। उग्र लोग प्रशासन पर एक पक्षीय होने का आरोप लगा रहे थे।

समाचार लिखे जाने तक जामस्थल पर उग्र लोग अड़े थे। इधर सड़क जाम में फंसे वाहन भी की कतार लगातार बढ़ती जा रही थी। जिसके कारण जाम में फंसे लोगों की संख्या भी बढ़ गई। खास कर दूर जाने वाले लोग जाम के कारण काफी परेशान रहे। स्थानीय प्रशासन जाम को हटाने को लेकर प्रयास में जुटे थे, लेकिन आक्रोशित लोगों को देख प्रशासन कोई भी फैसला जल्दी बाजी में लेना नहीं चाह रहे थे।

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