समस्तीपुर। समस्तीपुर के स्वास्थ्य विभाग में कर्मियों के तबादले में आयी गड़बड़ी का निवारण का मुद्दा चार महीनों के बाद भी अनसुलझी है। जिसके कारण तबादला का पेंच सुलझने के बजाए उलझते जा रहा है। जिसके कारण जहां कार्यालयों में विभागीय कार्यों के निष्पादन भी प्रभावित होता है, वहीं इन तबादला के पेंच में फंसे दर्जनों कर्मियों को कई महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है। जिसके कारण दर्जनों कर्मियों के समक्ष आर्थिक संकट भी उत्पन्न हो गया है। आर्थिक संकट के कारण इन कर्मियों के बच्चों की पढ़ाई के अलावे बीमार कर्मियों के दवा की समस्या उत्पन्न हो गयी है। जबकि कुछ दिनों में कई पर्व का सिलसिला भी जारी हो जाएगा। आंदोलन के बावजूद तबादला का पेंच नहीं सुलझने के कारण अब बिहार चिकित्सा जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने आंदोलन का निर्णय लिया है। इस संबंध में महासंघ के जिलामंत्री राजीव रंजन ने तबादला में पेंच फंसाने का आरोप सीएस पर लगाया है।


साथ ही उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर तक सीएस को समस्या निराकरण के लिए डेड लाइन दिया गया है। इसके बाद नौ अक्टूबर से सीएस कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना सत्याग्रह आंदोलन शुरु किया जाएगा। जिसकी पूरी जवाबदेही सीएस की होगी। विदित हो कि चार महीने पूर्व स्वास्थ्य विभाग के अलावे अन्य विभागों में भी बड़े पैमाने पर डीएम के द्वारा तबादला किया गया था। जिसमें कर्मचारी महासंघ के द्वारा गड़बड़ी होने पर आपत्ति व्यक्त किया गया। जिसके बाद सामने आए त्रुटियों को सुधार किया गया। इस कड़ी में स्वास्थ्य विभाग में त्रुटियों को दूर करते हुए कई कर्मियों का तबादला विभिन्न कारणों को दर्शाते हुए स्थगित किया गया। इस दौरान कई कर्मी अपने नए स्थानों पर योगदान भी कर लिए। बाद में स्थगित होने पर पूर्व से कार्यरत कर्मी भी पुन: वापस हो गए। जिसके कारण कई अस्पतालों में पद से अधिक कर्मी पोस्टेड हो गए। जिसका समायोजन आज तक नहीं हो पाया है।


समायोजन एवं बीमार कर्मी की समस्याओं के मकड़जाल में विभिन्न संवर्ग के कर्मी फंसे हैं। इसमें लिपिक, मेल फैमिली प्लानिंग वर्कर (एपएफपीडब्ल्यू), एनआरएचएम में फार्मासिस्ट, लेखापाल, आयुष चिकित्सक, बीसीएम सहित अन्य संवर्ग के कर्मी का समायोजना बांकी है। लिपिक संवर्ग में अनुमंडलीय अस्पताल रोसड़ा, पूसा, पीएचसी पटोरी, सीएचसी वारिसनगर, विभूतिपुर, कल्याणपुर सहित अन्य संस्थानों में पद से अधिक कर्मी की पोस्टिंग हैं, जो फिलहाल अतिरेक कर्मी के रुप में हैं। सदर अस्पताल, सीएचसी हसनपुर, पीएचसी बिथान के अलावे जिला मलेरिया कार्यालय, औषधी निरीक्षक कार्यालय सहित अन्य संस्थानों में लिपिक का पद खाली है। हालांकि सदर अस्पताल व मलेरिया विभाग में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कार्यों का संचालन किया जा रहा है।


अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि सीएस के लापरवाही एवं उदासीनता के कारण कर्मियों का समायोजन लंबित है। स्थापना की बैठक में भी समुचित तरीके से प्रस्ताव नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि जिन संस्थानों में त्रुटि निवारण के बाद अतिरेक लिपिक या अन्य कर्मी हैं, वैसे कर्मी के द्वारा तबादला के दौरान दिए गए विकल्प के आलोक में रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजन करना है। इसके अलावे निदेशक प्रमुख के द्वारा जारी पत्र के आलोक में महिला लिपिक का तबादला रोका जाना है। वहीं गंभीर रुप से बीमार कर्मी या उनके माता-पिता, पत्नी या बच्चे के बीमार होने की स्थित में भी ऐसे कर्मी का तबादला नहीं करना है। लेकिन डीएम के निर्देश के बावजूद आज तक समायोजन नहीं किया गया। कई स्थानों पर लिपिक के पद रिक्त होने के कारण चार महीने के बाद भी प्रभार का आदान प्रदान नहीं हो पाया है। जिसके कारण कर्मियों को वेतन का भी भुगतान नहीं हो पाया है।





