नई दिल्ली। नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल(राजद) प्रमुख लालू प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सीबीआई ने मंगलवार को अदालत को जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने राजद प्रमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश गीताजंलि गोयल की अदालत में सीबीआई की ओर से बताया गया कि लालू प्रसाद के खिलाफ दायर नए आरोपपत्र में अब सुनवाई हो सकती है। उन्हें गृहमंत्रालय से इसकी मंजूरी मिल गई है।


सीबीआई ने यह भी कहा कि रेलवे के तत्कालीन तीन अधिकारी महीप कपूर, मनोज पांडे और डॉ. पी. एल. बनकर के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास लंबित हैं। उम्मीद है कि इस सप्ताह इन तीनों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल जाएगी। सीबीआई ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें इन तीनों के खिलाफ मंजूरी लेने के लिए समय दिया जाए। इसके बाद अदालत ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है।


ज्ञात रहे कि सीबीआई ने 18 मई 2022 को लालू और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात लोक सेवकों सहित 15 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जुलाई में कहा था कि उसने लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती की 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और उनके खिलाफ धनशोधन जांच के तहत जुड़ी कंपनियों को जब्त कर लिया गया है। इसके बाद सीबीआई ने 3 जुलाई को लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनके बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। अदालत ने इस मामले से जुड़े आरोपपत्रों पर भी सुनवाई अगली तारीख पर होगी।

क्या है पूरा मामला
1.रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिमी मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी नियुक्तियां की गईं।
2.सीबीआई के मुताबिक, नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों द्वारा जमीन राजद सुप्रीमो के परिवार को उपहार में दी गई या हस्तांतरित की गई थी।

3 .जांच एजेंसी ने पिछले साल अक्टूबर में लालू और अन्य के खिलाफ मामले में पहला आरोप पत्र दायर किया था। यह रेलवे के मुंबई मुख्यालय वाले सेंट्रल जोन में की गई नियुक्तियों से संबंधित था।





