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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर पीएचसी में हड़ताल के दौरान प्रसव कक्ष के गेट के बाहर ही प्रसव मामले में अब जांच रिपोर्ट तलब किया गया है। साथ ही आंदोलन के दौरान शामिल आशा कार्यकर्ताओं को चिंहित करने का आदेश दिया है। ताकि ऐसे आशा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। वहीं प्रसव कार्य को बाधित करने एवं गेट के बाहर ही प्रसव होने की घटना को महासंघ एवं गोपगुट के जिला मंत्री ने भी निंदा करते हुए जांच की मांग की है।

बतादें कि जिले में जारी आशा कार्यकर्ताओं के हड़ताल के विभूतिपुर अस्पताल में भी विरोध किया जा रहा था। इसी दौरान गुरुवार को एक गर्भवति को प्रसव के लिए परिजन अस्पताल पहुंचे। लेकिन कुछ आशा कार्यकर्ताओं ने गेट के अंदर प्रसूता को नहीं जाने दिया। इस दौरान परिजनों से भी काफी नोकझोंक हुई। जबकि प्रसव वेदना से गर्भवति गेट के बाहर बरामदे पर ही तड़प रही थी।

इसके बावजूद किसी आशा कार्यकर्ताओं ने उसे ना तो कोई मदद की और ना ही प्रसव कक्ष में जाने दिया। जिसके कारण गर्भवति का बरामदे पर ही प्रसव हो गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और मामले की जांच का आदेश दिया गया।

इस मामले में सीएस डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि विभूतिपुर की घटना मामले में पीएचसी प्रभारी से जांच रिपोर्ट मांगी गयी है। जांच रिपोर्ट में संबंधित आशा कार्यकर्ताओं को चिंहित करने का आदेश दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

इधर, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री राजीव रंजन एवं गोपगुट महासंघ के जिला मंत्री अजय कुमार ने कहा कि संवैधानिक तरीके से हड़ताल होना चाहिए। इमरजेंसी या ओपीडी सेवा को बाधित नहीं करना है।विभूतिपुर की घटना अमानवीय है। ऐसे मामले की जांच होनी चाहिए।

बता दें कि आशा कार्यकर्ताओं की हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य सेवा को बाधित करने को लेकर सरकार भी अब सख्ती से निपटने की तैयारी में जुटी हुई है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी सिविल सर्जन एवं डीएम को पत्र जारी करते हुए उपद्रव करने वाली आशा कार्यकर्ताओं एवं फैसिलिटेटर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।

इस कड़ी में सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने भी समस्तीपुर जिले के सभी पीएचसी, अनुमंडलीय अस्पताल एवं रेफल अस्पताल के प्रभारियों को पत्र जारी करते हुए स्वास्थ्य सेवा बाधित करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को चिन्हित करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।






