मेरे विचार में काव्य एक ऐसी सशक्त साहित्यिक विधा है, जिसमें शब्द अर्थ ही नहीं बल्कि इसमें छिपे भावों को भी समाहित करते हैं, जो गहरा और वांछित प्रभाव छोड़ते हैं

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समस्तीपुर। भाषा बात कहने के लिए शब्द प्रदान करती है। किसी बात का प्रभाव किसी अन्य पर क्या होगा, यह इस पर निर्भर है कि किन शब्दों का चयन किया जाए। मेरे विचार में काव्य एक ऐसी सशक्त साहित्यिक विधा है जिसमें शब्द अर्थ ही नहीं बल्कि इसमें छिपे भावों को भी समाहित करते हैं और श्रोताओं पर गहरा और वांछित प्रभाव छोड़ते हैं। मैंने भी अपनी इस पुस्तक में अपनी बात को कहने के लिए काव्य को माध्यम बनाया है। इस पुस्तक का शीर्षक एहसास रखा गया है। यह अंश है समस्तीपुर डीआरएम आलोक अग्रवाल लिखित कविता संग्रह ‘एहसास’ के प्राक्कथन था।

समस्तीपुर डीआरएम आलोक अग्रवाल की रचित कविता संग्रह की दूसरी पुस्तिका ‘एहसास’ का विमोचन किया गया है। रेलवे ललित कला केंद्र में सादे सामारोह में कविता संग्रह लोकापर्ण किया गया है। कविता संग्रह के विमोचन के दौरान इस दौरान डीआरएम आलोक अग्रवाल के अलावे एडीआरएम वन जेके सिंह, एडीआरएम टू मनीष सिंह, सीएमएस डॉ. एसके मिश्रा, मंडल महिला कल्याण समिति की अध्यक्ष अनुजा अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों ने इस कविता संग्रह का विमोचन किया।

डीआरएम की यह दूसरी कविता संग्रह पुस्तक का विमोचन किया गया है। इससे पूर्व ‘पहला कदम’ नामक कविता संग्रह का प्रकाशन किया गया था। मिली जानकारी के अनुसार डीआरएम पिछले दस वर्षों से काव्य लिखते आ रहे हैं। अवकाश के दिन या फिर सुबह की सैर के समय यह अपनी बात व अनुभवों को काव्य के माध्यम से लिखते रहे।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, रहीम, कबीर की कविताओं एवं दोहा से प्रेरणा लेकर डीआरएम ने कविता लिखना शुरु किया। इसमें सबसे बड़ी खास बात यह रही कि अपनी अनुभवों के आधार को काव्य का रुप दिया गया। आलोक अग्रवाल ने कविता संग्रह के प्राक्कथन में अंकित करते हुए कहा है कि ‘एहसास’, इस शीर्षक को चुनने का कारण यह है कि इस पुस्तक में रचनाएं इस प्रकार से लिखी गयी है कि जैसे कि किसी परिस्थति में विशेष को मैंने स्वयं महसूस किया हो। व्यावहारिक जीवन से जुड़े अपने अनुभवों को विवेचनात्मक परंतु सहज रुप से कहने का प्रयास किया गया है।

साथ ही उक्त पुस्तक में ज्वलंत समसामयिक घटनाओं पर अपना दृष्टिकोण एक निष्पक्ष आलोचक के रुप में प्रस्तुत किया है। डीआरएम का मानना है कि गंभीर कविता केवल कहने सुनने और तालियां बजाकर आनंद लेने के लिए नहीं, बल्कि लोगों और समाज को कुछ विचार मंथन को बाध्यम करने के लिए है।

बतादें की समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आलोक अग्रवाल की यह नयी कविता संग्रह ‘एहसास’ अमेजन पर भी उपलब्ध है। इधर, नयी काव्य संग्रह के विमोचन के बाद रेनलवे के अधिकारियों एवं कर्मियों के द्वारा डीआरएम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। जानकारी के अनुसार कुछ दिनों के बाद तीसरी काव्य संग्रह की भी तैयारी शुरु कर दी गयी है।

एहसास नामक काव्य संग्रह पुस्तक में डीआरएम की लिखित 163 रचना का संग्रहण किया गया है। जिसमें मित्र, गुनाहगार आजाद क्यों, आखिर कब तक, ऐसा ही हूं मैं, बस इतना ही चाहिए, इंसाफ कब होगा सहित अन्य शीर्षक की कविता की सराहना काफी की जा रही है।

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