खतरनाक है रेलवे कॉलोनी का नाला, मौत को आमंत्रण दे रहा खुला नाला, वर्षो से नाला है खुला

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समस्तीपुर। रेलवे कॉलोनी के विकास एवं कर्मियों के आवास के मरम्मत व जीर्णोद्वार में लाखों रुपए प्रतिवर्ष खर्च किए जाते हैं। लेकिन इन कॉलोनी में खुले पड़े नालों के स्लैब पर अब तक किसी भी प्रकार की कोई योजना नहीं बनायी गयी। जो मौत को आमंत्रण दे रहा है।

जिसके कारण रेलवे कॉलोनी में बने सभी साइज का नाला खुला पड़ा है। जिसके कारण गुरुवार की सुबह खेलने के दौरान आरपीएफ इंस्पेक्टर का एकलौता पुत्र काल के गाल में समा गया। बताया जाता है कि आरपीएफ कैंटीन के पास बने नाले में बच्चे की डूबने से मौत हुई।

उक्त नाले की गहराई छह से आठ फीट की है। इस नाले होकर स्टेशन एवं कारखानों की गंदगी बहायी जाती है। यह नाला रेलवे कॉलोनी होते हुए एटीईएन कार्यालय, वाशिंगपीट, अटेरन चौक होते हुए जमुआरी नदी में जाकर गिरता है। लेकिन इस नाला में स्लैब की व्यवस्था नहीं है।

रेलवे कॉलोनी में तीन प्रकार का नाला है। कॉलोनी के क्वार्टर में से निकलने वाले छोटे-छोटे नाला है, जिसकी गहराई तीन से चार फीट है। यह नाला बड़ा नाला में जाकर मिलता है, जिसकी गहराई छह से आठ फीट है। इसका पानी मुख्य नाला में गिरता है, जिसकी गहराई नौ से दस फीट है।

रेलवे आरपीएफ कैंटीन के अलावे डीजल शेड व ट्रैक के बीच बने मेन नाला खुला है। इसके अलावे रेलवे अफसर कॉलोनी, गंडक कॉलोनी, जीतवारपुर रेलवे कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनी का नाला खुला पड़ा है। हालांकि गोल्फ फिल्ड रेलवे कॉलोनी का दो नाला स्लैब युक्त है।

समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आलोक अग्रवाल ने बताया कि नाला में गिरने से बच्चे की मौत मामले की जांच करायी जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि नाला किस परिस्थति में खुला हुआ है। इसकी भी जांच करायी जाएगी।

रेल कर्मियों ने बताया कि रेलवे कॉलोनी में वर्षों से सभी नाला खुला हुआ है। नाला की गहराई भी अधिक है। जिसमें बच्चे के गिरने के बाद मौत होना तय है। लेकिन रेलवे प्रशासन के द्वारा नाला को ढकने के लिए आज तक कोई स्लैब निर्माण नहीं कराया गया।

कालोनी में खुला नाला खतरनाक साबित हो रहा है। इससे पूर्व भी गंडक कॉलोनी में जलजमाव के समय कई लोग नाला में गिरने से जख्मी हो चुके हैं।

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