समस्तीपुर में जल संकट, लेकिन सदर अस्पताल में लापरवाही से हजारों लीटर पानी को प्रतिदिन किया जाता बर्वाद

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समस्तीपुर। एक तरफ जहां जिले में जल संकट की समस्या बनी हुई है। जलस्तर काफी नीचे खिसकने के कारण लोगों के बीच पानी को लेकर हायतौबा मचा हुआ है। वहीं सदर अस्पताल में प्रत्येक दिन हजारों लीटर पानी को यूं ही बर्वाद किया जाता है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही कहें या फिर उदासीनता, कारण चाहे जो भी हो, पानी की बर्वादी को नहीं रोका जा रहा है। वहीं लोग पीने के पानी के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की मानें तो यह सिलसिला महीनों से जारी है। मोटर को ऑन करने के बाद कर्मी ऑफ करना भूल जाते हैं, जिसके कारण प्रत्येक दिन हजारों लीटर पानी यूं ही नाला में बहाया जाता है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि यह गंभीर बात है। इसको लेकर सभी कर्मियों को निर्देश जारी किया जा रहा है। जो भी कर्मी मोटर को ऑन करेंगे, बंद करने की भी उनकी जवाबदेही होगी, अन्यथा उनके विरुद्ध अग्रतर कारवाई की जाएगी। डायलिसिस केंद्र के संचालक को भी इस संबंध में निर्देश दिया जा रहा है।

केस संख्या एक: सदर अस्पताल का प्रसव कक्ष की सफाई के लिए काफी पानी की जरुरत होती है। हर प्रसव के बाद साफ-सफाई की जाती है। जिसके लिए छत पर टंकी भी लगाया गया। लेकिन स्थिति यह है कि टंकी को भरने केबाद भी मोटर का स्वीच ऑफ नहीं किया जाता है, जिसके कारण प्रसव कक्ष के पीछे मलेरिया ऑफिस के बगल में प्रत्येक दिन हजारों लीटर पानी यूं ही बर्वाद किया जाता है।

केस संख्या दो: सदर अस्पताल परिसर स्थित डायलिसिस केंद्र के छत पर पानी का स्टॉक के लिए टंकी लगा हुआ है। लेकिन स्थिति यह है कि यहां भी मोटर को ऑन करने के बाद स्वीच ऑफ नहीं किया जाता है। जिसके कारण दिन भर टंकी भरने के बाद ओवर फ्लो पाइप से पानी नीचे गिरते रहता है। जिसके कारण जमीन पर मोटा काई जम चुका है। प्रत्येक दिन हजारों लीटर पानी को यूं ही बर्वाद किया जाता है।

आरओ के पानी से धोया जाता है बर्तन:
सदर अस्पताल के महिला वार्ड के बगल में सुधा के द्वारा आरओ प्लांट लगाया गया। ताकि सदर अस्प्ताल में आने वाले मरीजों एवं उसके परिजनों को शुद्ध पानी दिया जा सके। लेकिन स्थिति है वहां अब मरीज के परिजन बर्तन धोने के साथ ही कपड़ा भी धोने लगे हैं। जिसके कारण पीने के पानी को बर्वाद किया जाता है। हालांकि अस्पताल में कपड़ा व बर्तन धोने के लिए कोई उपयुक्त जगह नहीं होने के कारण लोग इसी पानी का उपयोग करते हैं।

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