समस्तीपुर। मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, लुधियाना, अमृतसर एवं वाराणसी के लोगों को समस्तीपुर की लीची खूब भा रही है। जिसके कारण इन राज्यों में समस्तीपुर की लीची की डिमांड काफी बढ़ गयी है। प्रत्येक दिन विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से इन शहरों में लीची भेजी जा रही है। ट्रेनों के माध्यम से जहां एक तरफ रेलवे के पार्सल आय के राजस्व में बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं लीची के किसान के साथ-साथ व्यापारियों को भी फायदा हो रहा है।

बतादें कि समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर, रोसड़ा व दलसिंहसराय क्षेत्र में इस बार लीची की अच्छी फसल हुई। यहां के लीची की डिमांड देख व्यापारी व किसान ट्रेनों के माध्यम से लीची को विभिन्न राज्यों में भेज रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक दिन समस्तीपुर स्टेशन से तीन से चार टन लीची का निर्यात किया जाता है। इससे रेलवे को 50 से 60 हजार रुपए की आय प्रतिदिन होती है। पिछले बीस दिनों से लगातार लीची का निर्यात विभिन्न राज्यों में किया जा रहा है।

विभिन्न यात्री ट्रेनों में एसएलआर कोच बढ़ने से व्यवसायियों को काफी फायदा होगा। फिलहाल सभी ट्रेनों में दो एसएलआर कोच होता है। इसमें आठ टन की क्षमता होती है। इसके लिए समस्तीपुर व दरभंगा को दो-दो टन माल बुकिंग की जाती है।

विभिन्न यात्री ट्रेनों में एसएलआर कोच बढ़ने से व्यवसायियों को काफी फायदा होगा। फिलहाल सभी ट्रेनों में दो एसएलआर कोच होता है। इसमें आठ टन की क्षमता होती है। इसके लिए समस्तीपुर व दरभंगा को दो-दो टन माल बुकिंग की जाती है।

वहीं चार टन केवल मुजफ्फरपुर स्टेशन के लिए सुरक्षित किया जाता है। लीची व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि लीची के सीजन में एसएलआर कोच की संख्या बढ़ाने से व्यवसाय में बढ़ोत्तरी हो सकती है।






