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पटना। मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर राज्य के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी डॉक्टरों को बायोमेट्रिक हाजिरी लगानी होगी। सदर अस्पताल से इसका प्रयोग शुरू किया गया है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने वैशाली और सारण सदर अस्पताल में प्रायोगिक तौर पर इसे एक महीने के लिए शुरू किया है। इसके बाद अन्य सदर अस्पताल और फिर निचले स्वास्थ्य संस्थानों में भी यह सेवा शुरू की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार अभी मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले चिकित्सकों को बायोमेट्रिक हाजिरी लगानी पड़ रही है। पूर्व में लिए गए निर्णय के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति ने अब इसका विस्तार करने का निर्णय लिया है। सदर अस्पतालों से इसकी शुरुआत की जा रही है। सभी सदर अस्पतालों में एक साथ इस सेवा को शुरू करने के बदले समिति ने दो अस्पतालों में ही इसे प्रयोग के तौर पर शुरू करने का निर्णय लिया है।

एक महीने तक इसका ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल सफल होने पर इसका विस्तार राज्य के सभी जिला (सदर) अस्पतालों और फिर बाकी स्वास्थ्य संस्थानों में होगा। वैशाली और सारण के सिविल सर्जन को भेजे गए पत्र में समिति की ओर से कहा गया है कि गृह विभाग की ओर से लिए गए निर्णय के आलोक में सरकारी कर्मियों को बायोमेट्रिक हाजिरी लगानी है।

स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस बनाने में हो रही कठिनाइयों के मद्देनजर बिहार बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम अप्लीकेशंस में शिफ्ट मैनेजमेंट और साप्ताहिक रोस्टर के लिए बेल्ट्रॉन की ओर से सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किया गया है। इस विकसित मॉड्यूल को पायलट परियोजना के तहत काम लिया जाना है।

इसलिए समिति ने दो जिले वैशाली और सारण का चयन किया है। बुधवार से यह व्यवस्था इन दोनों सदर अस्पतालों में लागू हो जाएगी। कोई परेशानी होने पर बेल्ट्रॉन के दो कर्मियों को समन्वय कार्य के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है।

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) डॉक्टरों के बायोमीट्रिक हाजिरी पर पहले ही नाराजगी जता चुका है। संघ के अपर महासचिव डॉ. हसरत अब्बास ने कहा कि चिकित्सा सेवा इमरजेंसी की श्रेणी में है। ऐसे में बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू होने से कई परेशानी होगी। चिकित्सकों के रहने की व्यवस्था भी नहीं है। कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से पहले ही कई जिले में डॉक्टरों का वेतन बंद कर दिया गया है, जो अनुचित है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे कि जहां बायोमीट्रिक सेवा चालू नहीं हैं, वहां के चिकित्सकों को समय पर वेतन मिलता रहे। मंगलवार को मोतिहारी में इसी मसले पर कुछ देर तक काम भी बाधित हुआ।





