वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रुप में मनायी गयी जयंती

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समस्तीपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में पूर्व अंतर्राष्ट्रीय मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी डॉ दादी जानकी की तीसरी पुण्यतिथि वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाई गई। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बटेश्वर नाथ पांडेय ने कहा कि दादीजी आध्यात्मिक शक्ति की धनी थी। उनका संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक रूप से जागृत होने के कारण विश्व के सौ से भी अधिक देशों में जाकर उन्होंने आध्यात्मिकता की अलख जगाई और अनेक देश-विदेश के भाई-बहनों में आध्यात्मिक मूल्यों की धारणा कराकर उनके जीवन को मूल्यनिष्ठ बनाया।


तरुण भाई ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति के बिना अन्य सभी जन-जागरूकता के बारे में बात करना ठीक वैसे ही है जैसे रेत की नींव पर बड़ी इमारत खड़ी करने की बात करना। आध्यात्मिक जागृति अर्थात आत्मा के मूल गुणों- शान्ति, प्रेम, पवित्रता, सुख, आनंद और शक्ति के आधार से कार्य-व्यवहार में आना। आध्यात्मिकता एक ऐसा धागा है जो सभी धर्मों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है।


कृष्ण भाई ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि एक समय संपूर्ण भारत जब आध्यात्मिक रूप से जागृत था, तब यहां सुख, शान्ति और समृद्धि की गंगा बहती थी। मानव देव मानव था, दूध-घी की नदियां बहती थी। लेकिन समय के चक्र में आकर कलियुग के प्रभाव से आध्यात्मिकता प्राय: लोप सी हो गई है और भौतिकवादिता की आंधी में बहकर दु:ख-अशान्ति का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है।


कार्यक्रम को जिला परिषद् अध्यक्ष खुशबू कुमारी, डॉ आरके मिश्रा ने भी संबोधित किया। स्वागत भाषण सविता बहन ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ओम प्रकाश भाई ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सतीश चांदना, चित्रा चांदना, डॉ राम जी चौरसिया, कृष्ण कुमार अग्रवाल, राकेश माटा, गोपाल कृष्ण भाई आदि उपस्थित थे।

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