समस्तीपुर। डाक्टर राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय के ढोली परिसर में स्थित ऑडिटोरियम में सोमवार को 30 दिवसीय दिक्षारंभ कार्यक्रम के तहत आर्ट व क्राफ्ट की शुरुआत हुई। वीसी डा पीएस पान्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों में छुपे हुए हुनर को ढूँढ कर तराशने का काम किया जा रहा है जिससे उनका सर्वागीण विकास हो सके। डीन पीपी सिंह द्वारा इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में यूथ मोटीवेटर व आर्टिस्ट कुंदन कुमार का मिथिला पद्धति का द्वारा स्मृति चिन्ह, चादर से सम्मानित किया गया। कुंदन कुमार राॅय ने बताया की मिथिला लोकचित्र कला विश्व प्रसिद्ध कला है और सबसे प्राचीनतम कलाओं में से एक है। कला से कलात्मकता ही नही सृजनात्मकता व एकाग्रता भी बढ़ती है। जो विद्यार्थीयो के लिए बहुत बहुत जरूरी है।

मिथिला पेटिंग का इतिहास रामायण काल से माना जाता है जब सिया राम का विवाह हुआ था। तबसे यह कला मिथिला के घर घर में भित्ति चित्र और अरीपन के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत में मिलती रही है। लेकिन आज यह कला विश्व में कीर्तिमान स्थापित कर रही है। आधुनिक परिवेश में यह पेपर, कपड़ों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले चीजों पर भी बन रही है और विश्व को मोहित कर रही है। यही कारण है कि आज हर कोई इस कला को सिख कर अपनी जीविका का साधन बनाना चाहते हैं। कलरब्लाईडनेस के बाद भी कुंदन कुमार राॅय ने मोटीवेशन व आर्ट के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाया है और चाहते हैं कि लोग अपनी कमियों से डरे नहीं लड़े व उसे अपना हथियार बना कर आगे बढ़े। डॉ संगीता देव, डॉ गायत्री, डॉ गंगाधर नंदा, डॉ विकास राय, डॉ प्रियंका, पुरुषोत्तम, जितेंद्र ने अपने विचार रखे और विद्यार्थीयो के उज्जवल भविष्य की कामना की। सभी विद्यार्थियों के लिए मिथिला लोकचित्र कला और मोटीवेशन से भरा यह कार्यक्रम एक सकारात्मक पहल लगा।







