समस्तीपुर। चैत्र नवरात्र 22 मार्च से शुरू हो रहा है। इस बार माता रानी नौका पर सवार होकर आएंगी और डोली पर सवार होकर जाएंगी। खानपुर के पंडित दिवाकर मिश्रा ने बताया कि 22 मार्च बुधवार को नौका पर माता के आने से विश्वकल्याण होगा। सभी कार्यों की सिद्धि होगी। वहीं दशमी तिथि शुक्रवार को होने पर माता डोली पर सवार होकर जाएंगी, जो प्राणियों के लिए कष्टकारक होगा। प्राकृतिक आपदाओं के संकेत हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। मान्यता है कि नवरात्र में माता का पाठ करने से देवी भगवती की खास कृपा होती है। मां दुर्गा को सुख, समृद्धि और धन की देवी माना जाता है। जो भक्त पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा करता है, उसे माता का खास आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि साल में चार बार नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। इसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि है और दो गुप्त नवरात्रि है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नवरात्र का त्योहार मनाया जाएगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र का त्योहार 22 से शुरू होकर 30 मार्च को समाप्त होगा। इस साल 22 मार्च से हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2080 की शुरुआत शुभ योग में हो रही है। हिंदू नववर्ष कई राशियों के लिए बहुत शुभ रहने वाला है। इसी दिन यानी 22 मार्च से नवरात्र की शुरुआत भी हो रही है। जानकारों का कहना है कि नए साल बुधवार से शुरू हो रहा है। इस कारण आकाशीय मंत्रिमंडल के राजा बुध रहेंगे, जबकि भोग विलास व सुख संपत्ति के कारक शुक्र ग्रह मंत्री की भूमिका में होंगे। बुध के राजा होने की वजह से धार्मिक कार्य में लोगों की रुचि बढ़ेगी और स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक होंगे। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल 2023 से 15 मई 2023 तक चर्तुग्रही योग बनने और 10 मई से 30 जून तक मंगल व शनि के बीच षडाष्टक योग बनने से विश्व के कुछ देशों में आपसी टकराव बढ़ेगा।







