पांचवीं के बाद 28% बच्चे छोड़ रहे पढ़ाई, माध्यमिक कक्षाओं में नामांकन बढ़ाने को विशेष अभियान

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Doorbeen News Desk: पटना। बिहार में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार पांचवीं से छठी कक्षा में जाने के दौरान करीब 28 फीसदी बच्चे पढ़ाई से बाहर हो रहे हैं। इनमें से करीब 9 फीसदी बच्चे पूरी तरह स्कूल छोड़ देते हैं, जबकि शेष बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के मुताबिक, पिछले वर्ष माध्यमिक कक्षाओं में जाने वाले बच्चों की दर करीब 78 फीसदी थी, यानी 22 फीसदी बच्चे आगे की पढ़ाई में नामांकन नहीं ले पाए थे। इस वर्ष प्रारंभिक आंकड़ों में यह अंतर बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।

माध्यमिक कक्षाओं में नामांकन बढ़ाने पर जोर

शिक्षा विभाग ने माध्यमिक कक्षाओं में बच्चों के कम नामांकन को चुनौती के रूप में लिया है। स्कूल छोड़ चुके और अब तक अगली कक्षा में नामांकन नहीं कराने वाले बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सितंबर तक माध्यमिक कक्षाओं में नामांकन की छूट भी दी गई है, ताकि किसी कारण से नामांकन से वंचित बच्चे फिर स्कूल लौट सकें।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ऊपर की कक्षाओं में बच्चों के कम नामांकन को सरकार ने गंभीरता से लिया है। बच्चों और अभिभावकों की समस्याओं को चिन्हित कर उनका समाधान किया जा रहा है। ड्रॉपआउट और ट्रांजिशन दर को न्यूनतम स्तर पर लाने की योजना पर काम हो रहा है।

प्रारंभिक कक्षाओं के बाद बढ़ता है ड्रॉपआउट

यू-डाइस की पिछले वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार प्रारंभिक कक्षाओं से माध्यमिक स्तर की ओर जाने वाले बच्चों की संख्या करीब 99.9 फीसदी थी। लेकिन माध्यमिक कक्षाओं में यह आंकड़ा घटकर 78 फीसदी और इससे ऊपर की कक्षाओं में करीब 74 फीसदी रह जाता है। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती कक्षाओं के बाद बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो रहे हैं।

गरीबी से लेकर दूरी और बाल विवाह तक कारण

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के पढ़ाई छोड़ने के पीछे कई कारण हैं। ग्रामीण इलाकों में आर्थिक परेशानी, अभिभावकों में जागरूकता की कमी, घरेलू जिम्मेदारियां, कम उम्र में काम करना, विद्यालय की दूरी और बाल विवाह जैसे कारण प्रमुख हैं। कई जगह प्रारंभिक विद्यालय तो नजदीक हैं, लेकिन माध्यमिक विद्यालय दूर होने के कारण भी बच्चे आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के साथ बच्चों एवं अभिभावकों को माध्यमिक शिक्षा के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।

सरकार का दावा—सरकारी स्कूल होंगे बेहतर

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाना है। स्कूलों में विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी काम किया जा रहा है। विभाग की योजना है कि आने वाले समय में माध्यमिक और उच्च कक्षाओं में बच्चों का नामांकन अधिक से अधिक बढ़ाया जाए।

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