15 अगस्त से बिहार के सरकारी अस्पतालों में लागू होगी नई रेफरल नीति, बिना ठोस कारण मरीज भेजने पर होगी कार्रवाई

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Doorbeen News Desk: पटना। बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और व्यवस्थित इलाज उपलब्ध कराने के लिए 15 अगस्त से नई रेफरल नीति लागू की जाएगी। शुरुआती चरण में जिला अस्पतालों में इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। वहीं प्रखंड स्तरीय अस्पतालों को भी मरीजों को बड़े अस्पताल में रेफर करने से पहले निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

स्वास्थ्य विभाग ने नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। जिला अस्पतालों की आईसीयू व्यवस्था को सक्रिय करने के साथ ऑक्सीजन, दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मानव संसाधन की कमी को दूसरे अस्पतालों से डॉक्टरों की सेवा लेकर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

बिना ठोस चिकित्सीय कारण नहीं होगा रेफर

नई नीति के तहत डॉक्टर किसी मरीज को तभी उच्च स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफर कर सकेंगे, जब संबंधित बीमारी या आवश्यक उपचार की सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो। रेफर करने का ठोस चिकित्सीय कारण बताना अनिवार्य होगा।

मरीज की ओपीडी, इमरजेंसी, जांच और उपचार से जुड़ी पूरी जानकारी भाव्या पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। रेफर किए जाने का कारण भी पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा और इसकी कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज या परिजन को उपलब्ध कराई जाएगी।

गंभीर मरीज को पहले किया जाएगा स्थिर

किसी गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले अस्पताल में उसका आवश्यक प्राथमिक उपचार कर स्थिति को स्थिर करना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही उसे उच्च संस्थान भेजा जाएगा।

सरकारी एंबुलेंस से ही भेजे जाएंगे मरीज

नई व्यवस्था के तहत रेफर किए गए मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने के लिए सरकारी एंबुलेंस (ALS/BLS) का उपयोग किया जाएगा। रेफरल की सूचना विभागीय मुख्यालय को भी देनी होगी।

लापरवाही पर डॉक्टरों की तय होगी जवाबदेही

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना उचित कारण सामान्य मरीजों को भी बड़े अस्पतालों में भेजने या रेफरल नीति का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए अलग निर्धारित प्रारूप में रेफरल का कारण दर्ज करना होगा।

 

 

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी होगी दूर

जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, वहां सिविल सर्जनों को जिले के दूसरे अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञों की सेवा लेने का निर्देश दिया गया है। हड्डी रोग, नेत्र रोग, स्त्री रोग सहित अन्य विभागों में विशेषज्ञों की कमी को भी दूर करने की प्रक्रिया चल रही है।

विभाग ने डॉक्टरों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सिविल सर्जन स्तर से कार्रवाई की जाएगी। नई रेफरल नीति का उद्देश्य जिला अस्पतालों को मजबूत करना और अनावश्यक रूप से मरीजों को बड़े अस्पतालों में भेजने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।

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