दो दिन की बारिश से खेतों में लौटी उम्मीद: धान की नर्सरी में जुटे किसान, अब भी मानसून पर टिकी नजर

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। दो दिनों से हुई हल्की बारिश ने जिले के किसानों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटा दी है। जून भर भीषण गर्मी और बारिश की बेरुखी से धान की खेती पिछड़ने लगी थी। कई किसान बिचड़ा (धान की नर्सरी) डालने से रुके हुए थे, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं मिलने से बीज खराब होने का डर था। अब हल्की बारिश के बाद गांव-गांव में किसान खेतों की ओर लौट आए हैं और धान की नर्सरी तैयार करने का काम तेज हो गया है।

जिले में इस वर्ष करीब 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में सामान्य बारिश होती रही तो रोपनी समय पर पूरी हो जाएगी। हालांकि किसान अब भी मानसून की नियमित बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

कुछ किसानों ने पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी

जिले के कई प्रखंडों में सिंचाई सुविधा वाले किसानों ने पहले ही धान का बिचड़ा डाल दिया था। लेकिन बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक बारिश पर निर्भर हैं। हल्की बारिश के बाद अब वे भी खेत तैयार करने में जुट गए हैं ताकि रोपनी में देरी न हो।

जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सुमित सौरभ ने बताया कि कई प्रखंडों में धान की नर्सरी पहले ही लग चुकी है। जहां अब तक बिचड़ा नहीं डाला गया था, वहां भी किसान तेजी से काम शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर नर्सरी तैयार होने से रोपनी और बाद में कटाई भी निर्धारित समय पर हो सकेगी।

पिछले साल का नुकसान अब भी किसानों के जेहन में

वर्ष 2025-26 में भी जिले में करीब 76 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी, लेकिन कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश ने हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया था। खेतों में तैयार फसल डूब गई थी और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।

इसी वजह से इस बार किसान शुरुआत से ही मौसम को लेकर सतर्क हैं। उनका कहना है कि खेती शुरू तो हो जाएगी, लेकिन पूरी फसल मानसून की नियमित बारिश पर ही निर्भर करेगी।

‘बारिश नहीं हुई तो सिंचाई करना हर किसान के बस की बात नहीं’

कल्याणपुर प्रखंड के सिमरिया भिंडी गांव के किसान लालबाबू झा कहते हैं कि हल्की बारिश से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन केवल इससे खेती पूरी नहीं होगी। धान की रोपनी और फसल बचाने के लिए लगातार पानी की जरूरत होगी।

उनका कहना है कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ेगी, जिसकी लागत काफी अधिक है। डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण छोटे और मध्यम किसानों के लिए बार-बार सिंचाई कर पाना आसान नहीं है। कई गांवों में बिजली की समुचित व्यवस्था भी नहीं है, जिससे विद्युत चालित सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाता।

किसानों की नजर अब अगले मानसूनी दौर पर

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो धान की खेती रफ्तार पकड़ लेगी। फिलहाल हल्की बारिश ने खेतों में नमी तो दी है, लेकिन खरीफ सीजन की सफलता के लिए नियमित मानसूनी वर्षा बेहद जरूरी है। ऐसे में समस्तीपुर के किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि मानसून पूरी तरह सक्रिय हो और उनकी मेहनत रंग लाए।

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