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Samastipur News: शिवाजीनगर मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मई माह के प्रथम शनिवार को प्रखंड के सभी विद्यालयों में सुरक्षित शनिवार का आयोजन पूरे उत्साह और जागरूकता के साथ किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य विषय आगलगी के खतरे और उससे बचाव की जानकारी थी। जिसके अंतर्गत विद्यालयों में छात्र छात्राओं को इस मौसम के दौरान आग लगने से बचने की सावधानियों के तरीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में आग लगने के खतरे और उससे बचाव की जानकारी के प्रति चेतना जागृत करना और उन्हें आपातकालीन स्थिति में आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार करना था। इस मौसम में अक्सर लोग असावधानीवश आग को इधर उधर जलता हुआ छोड़ देते हैं। इससे आग लगने का खतरा अधिक होता है। इसे ध्यान में रखते हुए, इस जागरूकता अभियान के जरिए यह समझाया गया कि थोड़ी सी सतर्कता आगलगी की घटना व जान के जोखिम से बचा सकती है।


यह कार्यक्रम प्रखंड के सभी विद्यालयों में आयोजित किया गया। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं, प्रधानाध्यापकों और नोडल शिक्षकों ने कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर भाग लिया। प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, सतनारायण आर्य, प्रकाश कुमार, दिलीप ठाकुर, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, शांति भूषण, नीलू कुमारी, संतोष कुमार, देवानंद कामद, अरुण पासवान, रामनाथ पंडित, मोहम्मद अब्दुल्लाह, मदन कुमार, मोहम्मद जैनुद्दीन, सरिता कुमारी, संजीत पोद्दार, मृत्युंजय कुमार सिंह, उमेश प्रसाद राय, अजय कुमार राय, संजीव कुमार, बिहारी दास, अशोक कुमार, अवधेश चौधरी, राजकुमार राय सहित अन्य प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक ने छात्रों को बताया कि इस मौसम में थोङी सी चूक के कारण आगलगी की घटनाएँ होती हैं।
इस सप्ताह की गतिविधियों में विद्यार्थियों को अग्नि सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालयों में आयोजित होने वाली इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में वे सही निर्णय ले सकें। विद्यार्थियों को बताया गया कि आग एक अत्यंत खतरनाक आपदा है, जो प्रायः लापरवाही के कारण लगती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय “रुको झुको लुढ़को तकनीक अपनाने की जानकारी दी गई। साथ ही “भागना नहीं, धक्का नहीं” जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों का अभ्यास भी कराया गया।


गतिविधियों को इंडोर एवं आउटडोर दोनों माध्यमों से आयोजित किया गया। कक्षा के भीतर प्रश्नोत्तरी, चर्चा एवं चित्र आधारित गतिविधियाँ की गई। जबकि मैदान में मॉक ड्रिल एवं सुरक्षा अभ्यास कराया गया। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा तथा वे वास्तविक परिस्थितियों में सजग रहना सीखे। विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण निर्माण तथा बच्चों में आपदा प्रबंधन संबंधी जागरूकता विकसित करने हेतु यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से में ‘क्या करें और क्या न करें’ पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया।
प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक ने बताया कि मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना, स्वास्थ्य संबंधी सही आदतों का विकास करना, आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देना व सिखाना है। इस जागरूकता अभियान में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकगणों की सराहनीय भूमिका रही। उन्होंने न केवल छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, बल्कि वास्तविक जीवन से जुड़ी घटनाओं के उदाहरण देकर बच्चों को सतर्क रहने की प्रेरणा भी दी। सुरक्षित शनिवार के तहत चलाया गया यह जागरूकता अभियान बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालयों में इस तरह के प्रशिक्षण नियमित रूप से होते रहें, तो निश्चित रूप से बच्चों में आपदा से निपटने की समझ विकसित होगी और वे स्वयं के साथ-साथ दूसरों की भी मदद करने में सक्षम बनेंगे।


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