मुजफ्फरपुर पुलिस को मिली बड़ी सफलता,  अपहरण के 6 साल बाद युवक बंगाल से बरामद

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मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित सुजीत दास अपहरण कांड में पुलिस को 6 वर्षों के बाद एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। 2020 से लापता सुजीत दास को विशेष पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल से सुरक्षित बरामद कर लिया है। यह मामला पुलिस के लिए इस कदर चुनौतीपूर्ण था कि युवक की सूचना देने वालों के लिए 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई थी और सीआईडी (CID) की टीम भी लगातार इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हुई थी।

घटना की शुरुआत 26 नवंबर 2020 को हुई थी, जब पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर की रहने वाली सैफाली दास ने मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि वह अपने तीन बेटों के साथ ठेकेदार मोहम्मद अजिराउल के पास एमआईटी (MIT) मुजफ्फरपुर में मजदूरी करने आई थीं। 15 नवंबर 2020 को मुंशी वीरेंद्र कुमार उनके मंदबुद्धि बेटे सुजीत दास को बीबीगंज स्थित एक साइट पर काम के बहाने ले गया, जिसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। मुंशी द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर मां ने अपहरण की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया था।

समय बीतने के साथ यह मामला पेचीदा होता गया और अपहृत सुजीत का कोई सुराग नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें सीआईडी की एंट्री हुई। जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में पूर्व के दो अनुसंधानकर्ताओं (IO) पर गाज भी गिरी और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। बावजूद इसके, सुजीत का पता नहीं चल सका, जिसके बाद पुलिस मुख्यालय ने उसकी बरामदगी पर 3 लाख रुपये के भारी-भरकम इनाम की घोषणा कर दी थी।

वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस केस को साख का सवाल बनाते हुए इसे एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उनके निर्देश पर एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें ब्रह्मपुरा थानाध्यक्ष सह वर्तमान अनुसंधानकर्ता विपिन रंजन को शामिल किया गया।

इस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट के आधार पर बंगाल में छापेमारी की और आखिरकार 6 साल के लंबे इंतजार के बाद सुजीत दास को ढूंढ निकाला।

एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा ने बताया कि सुजीत की मां ने इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल में भी प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिससे यह केस दो राज्यों के बीच उलझा हुआ था। पुलिस के लिए यह एक राहत भरी खबर है कि सुजीत जीवित और सुरक्षित मिल गया है। फिलहाल पुलिस सुजीत से पूछताछ कर रही है ताकि इन 6 वर्षों की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस अब उसे 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए न्यायालय में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।

 

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