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चैती छठ से पहले घाटों की बदहाल स्थिति, सफाई-लाइटिंग व बैरिकेडिंग का अभाव, व्रतियों की बढ़ी चिंता
Doorbeen News Desk: चैती छठ महापर्व नजदीक है, लेकिन समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न घाटों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। पर्व को लेकर अब तक न तो घाटों की समुचित सफाई कराई गई है और न ही सुरक्षा व सुविधा से जुड़े आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में छठव्रतियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।बूढ़ी गंडक नदी किनारे स्थित विभिन्न छठ घाटों सहित अन्य तालाबों और जलाशयों के किनारे गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई स्थानों पर कचरे के ढेर, प्लास्टिक फैली हुई है, जिससे न सिर्फ वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।घाटों पर अब तक बैरिकेडिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे गहरे पानी वाले क्षेत्रों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। हर साल छठ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षा इंतजामों का अभाव गंभीर चिंता का विषय है।

:-लाइटिंग की व्यवस्था नहीं, अंधेरे में होगी पूजा:-
छठ पर्व के दौरान शाम और सुबह अर्घ्य के समय पर्याप्त रोशनी की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकांश घाटों पर अभी तक लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे व्रतियों को अंधेरे में पूजा-अर्चना करनी पड़ सकती है, जो जोखिम भरा भी हो सकता है।
:-नगर निगम की तैयारी पर उठे सवाल:-
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष छठ पर्व से पहले घाटों की सफाई और आवश्यक तैयारियां समय पर शुरू कर दी जाती थीं, लेकिन इस बार निगम की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण पर्व की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।

:-व्रतियों की बढ़ी चिंता:-
छठव्रतियों का कहना है कि यह आस्था का महापर्व है, जिसमें साफ-सफाई और सुव्यवस्थित घाटों का विशेष महत्व होता है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
:-प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग:-
स्थानीय नागरिकों और छठव्रतियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि अविलंब घाटों की सफाई कराई जाए, बैरिकेडिंग और लाइटिंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुचारू रूप से पूजा-अर्चना कर सकें। अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन समय रहते इन समस्याओं का समाधान कर पाता है या नहीं, ताकि छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।








