2047 के विकसित भारत निर्माण में महिलाओं का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा : कुलपति

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2047 के विकसित भारत निर्माण में महिलाओं का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा : कुलपति

Doorbeen News Desk: हमारी सनातन संस्कृति में पत्नी के साथ ही पति पूर्ण होता है। महिलाओं को यथोचित शिक्षा के साथ सम्मान एवं महत्त्व दिया जाता था। परिवार को सुदृढ़ बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि वे परिवार की आधारशिला मानी जाती हैं। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय गृह विज्ञान विभाग तथा जीविका, पटना के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही।

कुलपति ने महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि आज शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी आदि सभी क्षेत्रों में महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यद्यपि मध्यकाल में बाह्य आक्रमणकारियों एवं मुगल आदि शासनकाल में कुछ कारणों से नारियों पर प्रतिबंध लगाए गए। फिर बंगाल से हुए कई सामाजिक सुधार आंदोलनों के फलस्वरूप उनके अधिकार मिलने शुरू हुए। आज वे अपनी शिक्षा, संघर्ष एवं काबिलियत के बदौलत मजबूत स्थिति में हैं। उन्हें अपने कदम आगे बढ़ाते रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2047 के विकसित भारत निर्माण में महिलाओं का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा।

मुख्य अतिथि के रूप में डीपीएम, जीविका, दरभंगा डॉ रिचा गार्गी ने जीविका का विस्तार से परिचय एवं महत्त्व बताते हुए कहा कि जीविका दीदी ने 10 रुपए से 1 लाख तक का सफर किया है। आज इनकी बदौलत गांव में न केवल पढ़ाई, खान-पान, शौचालयों का उपयोग आदि में सामाजिक परिवर्तन दिख रहा है, बल्कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा आदि में भी काफी कमी हुई है। जीविका के माध्यम से गांव की एक महिला भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि जीविका पूरी तरह महिलाओं का संगठन है, जिसका सफर 14 वर्षों का है। पिछले तीन वर्षों में जीविका दीदी पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन बना रही है, नर्सरी चलकर पौधे उपलब्ध करा रही हैं। इससे जुड़कर महिलाएं उद्यमी भी बन रही हैं।

सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो शाहिद हसन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे विश्वविद्यालय में छात्राएं अधिक संख्या में नामांकन ले रही हैं जो महिला सशक्तिकरण का एक प्रमाण है। यह दिवस सभी महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं समानता के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रोग्रेसिव कुलपति के कुशल नेतृत्व में हमारा विश्वविद्यालय तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां स्तरीय पढ़ाई के साथ ही बेहतर शोध भी हो रहा है। स्वागत संबोधन में गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ दिव्या रानी हांसदा ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्राएं शिक्षा प्राप्त करें, आत्मविश्वास से अपने अंदर बदलाव लाएं और मजबूती से आगे बढ़ें।

कुलसचिव ने कहा कि जल्द ही हमारा जीविका से एमओयू भी साइन होने वाला है, ताकि हम महिला विकास हेतु अधिक से अधिक कार्य कर सकें। समारोह को जीविका से आये पूनम झा, मनोरमा कुमारी, स्मिता कुमारी, नरेश कुमार तथा राहुल कुमार आदि ने भी रिसोर्स पर्सन के रूप में संबोधित किया।
इस अवसर पर प्रो पुनीता झा, प्रो लवण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’, प्रो मनसा सुल्तानिया, डॉ आरती साह, डॉ कृष्णकांत झा, डॉ अनिल कुमार चौधरी, डॉ आर एन चौरसिया, डॉ ज्योति प्रभा, डॉ शीला यादव, डॉ निशात शाहीन, डॉ नसरीन सुरैया, डॉ नेहा वर्मा, डॉ निर्मला कुशवाहा, प्रीति पीटर, नन्हीं दुनिया प्ले स्कूल की नम्रता झा तथा उषा झा सहित 150 से अधिक शोधार्थी एवं छात्राएं उपस्थित थीं। समारोह का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत पौधा-गमला प्रदान कर तथा बैज लगाकर किया गया। समारोह का कुशल संचालन विभागीय प्राध्यापिका डॉ प्रगति ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्राची मारवाह ने किया।

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