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विशेष शिविर में 6 दिनों में 2.20 लाख किसानों में से 23 हजार किसानों को बना फार्मर रजिस्ट्री
Doorbeen News Desk: जिले में फार्मर रजिस्ट्री कार्य जोरों पर चल रहा है, किंतु किसानों का काम तेजी नहीं पकड़ रहा। किसानों को सुविधा के लिए 6 से 11 जनवरी तक विशेष कैंप लगाया गया।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जिले के लाभों को फार्मर रजिस्ट्री करना है। ताकि इसका समुचित लाभ मिल सके। जिले में दो लाख 20 हजार किसानों को इस योजना के तहत लाभ मिल रहा है, इन किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है। जिले छह दिनों में कुल 42 हजार किसानों को फार्मर रजिस्ट्री हुआ। जिसमें से 23 हजार प्रधानमंत्री निधि सम्मान योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री किया गया।
किसानों को लिए किसान अपने नाम जमाबंदी करेंगे, ताकि इस योजना का लाभ उन्हें मिल सके। इसके लिए कैम्प लगाया गया। यह सभी राजस्व गांव में कैंप लगाया गया। जिसमें राजस्व कर्मचारी एवं किसान सलाहकार की तैनाती की गई, ताकि किसानों का फार्म रजिस्ट्री हो सके, वही किसान सलाहकार किसानों का केवाईसी कर सके। किंतु जिले में तकनीकी कारणों के कारण इस अभियान को पंख नहीं लग सका। सर्वर की परेशानी तो रहती ही है, कई जगह राजस्व कर्मचारी भी नहीं रहते हैं। ऐसे में किसान जाए तो जाए कहां। जबकि सरकार के कैंप लगाने का मुख्य उद्देश्य यही था किसानों को ऑन द स्पॉट निपटारा कर सके।

-:फुलहरा कैंप में नहीं आ रहे राजस्व कर्मचारी:-कल्याणपुर प्रखंड के फुलहारा में आयोजित फार्मर रजिस्ट्री के लिए बनाएंगे कैंप में राजस्व कर्मचारी नहीं रहते हैं। जिसके कारण लोगों को समस्या का निपटारा नहीं होता है। गांव के किसान रामवीर कुंवर ने बताया कि मेरा खाता खेसरा संख्या अंकित था। फिर भी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सका। उपेंद्र मिश्र, शशिभूषण शर्मा, रामचंद्र ठाकुर ने बताया कि समस्या का समाधान ऑन द स्पॉट नहीं हो पता। कर्मचारी रहे तब तो उसको बताया जाए। यहां कर्मचारी नहीं है एक महिला कर्मी है, जो की इस संबंध में जानकार नहीं है। कई मामले ऐसे हैं, जिसमें वर्षों से जमाबंदी नंबर अंकित है, किंतु उसे ऑनलाइन नहीं किया गया। इसमें किसान की क्या गलती है, यह तो विभाग की गलती है।
-:राजस्व कर्मचारी की गलती की खामियां भुगत रहे किसान:-राजस्व कर्मचारी की गलती की खामियां इन दिनों किसान भुगत रहे हैं। किसानों के द्वारा काटे जा रहे हैं लगान रसीद में जमाबंदी खेसरा आदि में खामियां हैं। इनका ऑनलाइन भी नहीं किया गया। जिसके कारण किसान कैंप में आकर बैरंग वापस लौट रहे हैं। किसी के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक है, तो किसी के नाम में स्पेस की गलती है। जिसके कारण एग्रिस्टेक पोर्टल पर अपलोड नही लेता है।






