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पीपरोलिया में सवा लाख पार्थिव शिवलिंग के साथ भव्य सार्वजनिक बोल बम पूजा, श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक
Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत शंकरपुर पंचायत के पीपरोलिया गांव में रविवार को श्री श्री 108 सार्वजनिक बम पूजा संघ के तत्वावधान में सवा लाख मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग की भव्य सार्वजनिक बोल बम पूजा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक और आस्था से परिपूर्ण आयोजन में आसपास के 20 गांवों से आए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया और घंटों कतार में लगकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। पूजा की शुरुआत रविवार सुबह कुंवारी कन्याओं एवं महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य शोभा कलश यात्रा से हुई।
पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं सिर पर कलश लेकर पूरे गांव का भ्रमण करती हुई करेंह नदी पहुंचीं, जहां विधि-विधान से जल भरकर उसे पूजा मंडप में स्थापित किया गया। ढोल-नगाड़ों और “बोल बम” के जयकारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा। पांच विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सवा लाख मिट्टी से निर्मित पार्थिव शिवलिंग एवं बारह ज्योतिर्लिंगों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। आयोजन स्थल पर आकर्षक और भव्य मंडप का निर्माण किया गया था, जिसमें भगवान शंकर, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय एवं हनुमान जी की मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। मंडप की सजावट और रोशनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

इस बम पूजा में पीपरोलिया, पोखरभिंडा, रानीपरती, नवका टोल, काजी डुमरा, सुरिवा पोखर, रजौड़, तिलाही, मेंघुलिया नवका टोल, महादेवा, शंकरपुर, भुजहाईर, सितुआही, औरा सहित अन्य गांवों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा-अर्चना में महिलाओं, पुरुषों के साथ-साथ बच्चों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। बच्चों के मनोरंजन के लिए मेले जैसी व्यवस्था की गई थी, जिससे आयोजन में उत्सव का माहौल बना रहा।आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव ने बताया कि यह बोल बम पूजा पिछले लगभग 100 वर्षों से निरंतर होती चली आ रही है।

हर वर्ष लॉटरी सिस्टम के माध्यम से यह तय किया जाता है कि किस गांव में पूजा आयोजित होगी। चयनित गांव में सभी 20 गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु बोल बम पूजा में भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि पूजा के मुख्य जजमान एवं उनकी धर्मपत्नी एक माह पूर्व से ही कठिन नियमों का पालन करते हुए केवल दूध और फलाहार पर रहते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद ही अन्न ग्रहण किया जाता है।श्रद्धालुओं ने बताया कि इस पूजा के साथ सुल्तानगंज से जल लेकर कांवरियों द्वारा पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण की परंपरा भी जुड़ी हुई है। यह क्रम बसंत पंचमी तक चलता रहता है, जिसमें मिथिलांचल क्षेत्र के कांवरियों की भारी भीड़ बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ती है।
पूरे आयोजन में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। प्रशासनिक सहयोग और ग्रामीणों की सहभागिता से यह विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे क्षेत्र में धार्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिला है ।





