भक्तिमार्ग ही श्रीकृष्ण की कृपा पाने का सबसे सुगम और सहज पथ : प्रो. जयशंकर झा

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भक्तिमार्ग ही श्रीकृष्ण की कृपा पाने का सबसे सुगम और सहज पथ : प्रो. जयशंकर झा

Doorbeen News Desk: प्रखंड अंतर्गत दहियार रन्ना पंचायत के शहरू गांव के समीप आयोजित सार्वजनिक बम पूजा समस्तीपुर दरभंगा के अवसर पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन गुरुवार को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग उपस्थित रहे। इस अवसर पर कथावाचक आचार्य प्रो. जयशंकर झा ने भक्तिमार्ग की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की कृपा पाने का सबसे सुगम और सहज मार्ग भक्तिमार्ग ही है। कथावाचक

प्रो जयशंकर झा ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में सत्संग और कुसंग दो ऐसे मार्ग हैं जो क्रमशः कल्याण और पतन की ओर ले जाते हैं। सत्संग व्यक्ति के चरित्र निर्माण का आधार है, जबकि कुसंग मनुष्य को धीरे-धीरे अधोगति की ओर ले जाता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी युग में युवा वर्ग को सत्संग से जुड़कर अपने चरित्र और संस्कारों का निर्माण करना चाहिए। भागवत कथा की व्याख्या करते हुए कथावाचक प्रो. जयशंकर झा ने भक्तियोग, ज्ञानयोग और अष्टांग योग की तुलना अत्यंत रोचक ढंग से की।

उन्होंने कहा कि भक्तियोग से की गई आध्यात्मिक यात्रा पालकी पर बैठने जैसी है, जिसमें साधक को स्वयं अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता और वह सहज रूप से अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है। वहीं ज्ञानयोग और अष्टांग योग की यात्रा क्रमशः हाथी और घोड़े की सवारी के समान है, जिसमें सवार को निरंतर सजग और सावधान रहना पड़ता है, अन्यथा गिरने और पतन का भय बना रहता है।उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भ्रूण मां के गर्भ में बिना मांगे ही सभी आवश्यक वस्तुएं प्राप्त कर लेता है, उसी प्रकार भक्त भी परमात्मा से पूर्ण रूप से जुड़कर अपने सभी मनोरथों को प्राप्त कर लेता है। श्रीमद्भागवत के आख्यानों के माध्यम से उन्होंने इन्द्रियनिग्रह की आवश्यकता पर विशेष बल दिया और कहा कि वर्तमान समय में इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी साधना है।

कथावाचक प्रो. जयशंकर झा ने कहा कि आज का युग युवाओं के लिए अनेक प्रकार के आकर्षण और भटकाव से भरा हुआ है। ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाती है, बल्कि जीवन को संयमित और मर्यादित बनाने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से सत्संग से जुड़ने और कथा श्रवण करने की अपील की।कार्यक्रम के दौरान मंच का कुशल संचालन डॉ. बचनेश्वर झा ने किया, जबकि कथा पारायण का दायित्व पंडित हरेराम मिश्र ने निभाया। प्रवचन के बीच-बीच में सुप्रसिद्ध भजन गायक पारस पंकज एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत प्रसंगानुकूल भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति पर श्रोता झूमते नजर आए और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।उल्लेखनीय है कि प्रख्यात कथावाचक आचार्य प्रो. जयशंकर झा कथा के दौरान व्यासपीठ से प्रवचन देने के साथ-साथ शक्ति संचय की दृष्टि से दिन भर मौनव्रत का भी पालन करते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

कुल मिलाकर, सार्वजनिक बम पूजा के अवसर पर आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि समाज में नैतिकता, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार भी कर रही है। श्रद्धालुओं में आगामी कथा दिवसों को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मौके पर बम पूजा के अध्यक्ष मदन प्रसाद सिंह, सचिव पालतू सिंह, कोषाध्यक्ष उमेश सिंह, संजय कुमार सिंह, ललित मंडल, रामगुलाम सिंह सहित सभी ग्रामवासी सक्रिय दिखे।

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