दूरबीन न्यूज डेस्क, समस्तीपुर। राज्य सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी के पुत्र और खानपुर प्रखंड के प्रमुख सन्नी हजारी के कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने के साथ समस्तीपुर का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
राजनीतिक दल के नेता और कार्यकर्ता इसकी अपने -अपने तरह से विवेचना करने में लगे हुए हैं। आमलोगों का भी कहना है कि सन्नी हजारी के कांग्रेस से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने पर समस्तीपुर में रोचक चुनावी मुकाबला हो सकता है।


इसका कारण यह है कि एनडीए के घटक दल लोजपा (आर) ने जिस शांभवी चौधरी को समस्तीपुर में उम्मीदवार बनाया है, वे राज्य सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की पुत्री हैं और सन्नी हजारी भी राज्य सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी के पुत्र हैं। यानि एक तरह से राज्य सरकार के दो मंत्रियों के बीच चुनावी मुकाबला हो सकता है।


हालांकि महेश्वर हजारी स्पष्ट कर चुके है कि बेटे के राजनीतिक कदम से उनका कोई लेना देना नही हैं। वे जदयू के प्रति समर्पित थे और आज भी है।
सन्नी के कांग्रेस में शामिल होने और लोकसभा का उम्मीदवार बनाये जाने को लेकर दो दिनो से सोशल मीडिया पर तरह तरह के पोस्ट दावे और प्रतिदावे भी किये जा रहे थे।

उनके शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल होते ही राजनीतिक चर्चा ने और जोर पकड़ लिया। टिकट के दावेदार के रूप में सन्नी के कांग्रेस के आने से पहले से टिकट की आस में भागदौड़ कर रहे नेताओं को भी अपने प्रयास को मुकाम तक पहुंचाने के लिए नए सिरे से सोचने को विवश कर दिया है।

आधा दर्जन से अधिक दावेदार पुराने संपर्कों को साधे रखने के साथ उन लोगो से भी संपर्क में जुट गए हैं। जिनके माध्यम से सन्नी हजारी को टिकट लेने से रोका जा सके।
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस से उम्मीदवार की घोषणा होने में चार से पांच दिन का और वक्त लग सकता है। यहां किसी भी उम्मीदवार को टिकट देने की एक प्रक्रिया है।

पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी पहले टिकट के सभी दावेदारों के आवेदन पर विचार करेगी। उज़के बाद सीईसी में सभी की दावेदारी पर विचार विमर्श होगा। उसमें सर्वानुमति बनने के बाद ही टिकट फाइनल होगा।
फिलहाल समस्तीपुर लोकसभा के वोटरों की नजर महागठबंधन व कांग्रेस पर टिकी है। लोगो का कहना है कि अगर कांग्रेस से सन्नी हजारी को टिकट मिलता है तो शांभवी की राह आसान नही होगी।






