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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले में इन दोनों प्रमुख, उप मुखिया पर अविश्वास प्रस्ताव लगाने की प्रक्रिया काफी तेज गति से चल रही है। इस दौरान अविश्वास प्रस्ताव को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशी तरह-तरह के हथकंडे भी अपना रहे हैं। इसी सिलसिले में एक उप मुखिया के प्रत्याशी के द्वारा अपने पक्ष में मतदान करने को लेकर फायरिंग की गई। दहशत फैलाने के लिए पिस्तौल लहराते हुए फायरिंग करते हुए क्षेत्र में घूम रहे थे। जिसकी सूचना पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हथियार के साथ उप मुखिया के प्रत्याशी को गिरफ्तार कर लिया। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र का है।

हसनपुर प्रखंड के अहिलवार पंचायत के एक वार्ड सदस्य को दबंगई दिखानी महंगी पड़ गयी। हसनपुर पुलिस ने वार्ड सदस्य व उसके एक साथी को गिरफ्तार करने के साथ दो कट्टा, दो कारतूस व 08 लीटर शराब बरामद की है। उसकी बोलेरो भी जब्त की गयी है । इस संबंध में एसडीपीओ शिवम कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में हसनपुर के पिपरा वार्ड 06 निवासी स्व. रामाश्रय यादव का पुत्र विजय यादव तथा इसी थाना क्षेत्र के सिही वार्ड 04 निवासी तेजनारायण प्रताप सिंह का पुत्र रणवीर कुमार शामिल है।

विजय अहिलवार पंचायत का वार्ड सदस्य है। 10 जनवरी की शाम करीब 07 बजे एक बोलेरो वाहन में सवार कुछ लोगों के फायरिंग करते हुए सिही चौक से आगे बगराहा की तरफ बढ़ने की सूचना पर हसनपुर थानाध्यक्ष निशा भारती ने एक टीम का गठन किया गया, जिसमें थानाध्यक्ष हसनपुर, एसआई योगेन्द्र सिंह, पीएसआई सिकन्दर कुमार, एएसआई योगेश कुमार को शामिल किया गया।

टीम ने बगराहा चौक पर बोलेरो को पकड़ा। विजय व रणवीर के पास से दो कट्टा व कारतूस मिला। वहीं बोलेरो से 08 लीटर विदेशी शराब बरामद किया गया । एसडीपीओ ने बताया कि विजय यादव का आपराधिक इतिहास रहा है । इसके विरुद्ध हसनपुर थाना में कांड सं 207/17 दर्ज है, जो तत्कालीन मुखिया प्रतिनिधि के हत्या मामला का है । एसडीपीओ ने बताया कि धराये दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है ।

एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि आर्म्स के साथ धराया वार्ड सदस्य उपमुखिया पद का दावेदार था। हसनपुर के अहिलवार पंचायत में वर्तमान उपमुखिया पर अविश्वास की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके लिए 11 जनवरी की तिथि निर्धारित थी । इसी अविश्वास की प्रक्रिया को अपने पक्ष में करने के लिए विजय ने इस कदम को उठाया। विजय की मंशा दहशत फैलाकर सदस्यों को अपने पक्ष में कर लेने की थी। पर पुलिस ने समय रहते उसके मनसूबे पर पानी फेर दिया। निर्धारित तिथि को जब उसे प्रस्तावित बैठक में भाग लेना था तब वह पुलिस के कब्जे में था।







