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समस्तीपुर। जिले के बिरौली स्थित पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में तीन दिवसीय शिल्प प्रदर्शन जागरूकता कार्यक्रम का समापन बुधवार को किया गया। 11 से 13 दिसंबर तक चले इस कार्यक्रम मे 350 बच्चों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चो के बीच कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बच्चो को अपनी कला के प्रति आकर्षण पैदा करना, कला के माध्यम से स्वरोजगार की संभावनाओं की जानकारी देना है। इस कार्यक्रम में बिहार के प्रमुख शिल्पों का प्रशिक्षण दिया गया और प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जिसका परिणाम आज घोषित किया गया। जिसमे सभी विधाओं में विजेता बच्चों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।



प्राचार्य डॉक्टर टी एन शर्मा ने कहा भारतीय कलाएं बेहद प्राचीन है। सिंधु घाटी सभ्यता में भी खुदाई में अत्यंत दुर्लभ शिल्प मिले। अब अगर छात्रों को ऐसे शिल्प सिख कर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय पहचान और रोजगार मिले तो यह अनूठी पहल होगी। सहायक निदेशक वस्त्र मंत्रालय श्री विभूति कुमार झा ने कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। कैसे हस्त शिल्प के द्वारा कैसे बच्चों में शिल्प जागरूकता कर कैसे आगे रोजगार से जोड़ा जा सकता है। भारत की कलाएं विश्व की उच्चतम कोटि की कला है। उसे अक्षुण बनाए रखने में हस्तशिल्प का अतुलनीय योगदान है,
जो कृषि के बाद दूसरा स्वरोजगार का साधन है। भारत में
निफ्ट एंड एनआईडी भी हस्तशिल्प को बढ़ाने का कार्य करता है।


प्रेरक वक्ता कुंदन कुमार रॉय ने बच्चों को मोटिवेट करते हुए कहा की अपनी कमियों को हथियार बनाकर आगे बढ़े। हर इंसान को हुनरमंद होना चाहिए विपरीत परिस्थितियों में अक्सर ये हुनर काम आता है। जो आजीविका का बेहतर साधन बन सकता है और हर परिस्थिति में इंसान को सबल देता है। कला शिक्षक राजेश रंजन ने कला के व्यापक पहलुओं पर प्रकाश डाला। हस्त शिल्प संवर्धन अधिकारी अमित कुमार ने वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की तरफ से उपस्थित सभी गणमान्य व बच्चों का धन्यवाद ज्ञापन किया तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। शिल्प प्रशिक्षक अशोक पासवान, भोला पंडित, किरण कुमारी, समिता कुमारी, अंजु कुमारी ने अपना अतुलनीय योगदान दिया। वहीं जेएनवी शिक्षक आभा कुमारी, कुमुद रानी, किरण सिंह इत्यादि मौजूद थे।






