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समस्तीपुर। खानपुर बाजार स्थित आयताकार नुमा तालाब का वजूद धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। कई वर्षों से तालाब सूखा पड़ा है। आलम यह है कि इन दिनों बाजारु कूड़ा कचड़ा तालाब में फेंका जा रहा है।यूं कहें कि लोग तालाब में ही कूड़ा-कचरा का स्थान बना लिया है। तालाब के सूखा होने से छठ पूजा नहीं हो पाती है। पानी के अभाव में हर वर्ष छठ व्रतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस कारण लोग अपने-अपने घरों पर ही तालाब का रूप देकर छठ व्रती पूजा करते हैं।


हालांकि पिछले दो वर्ष से पानी रहता है, लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम रहता है। लेकिन गंदगी से वजह से पानी का महत्व नहीं है।आस्था का महापर्व छठ में महज दो दिन शेष रह गया है।लेकिन अबतक तालाब की उड़ाहीकरण नहीं हो पाया है।लोग घर पर ही गड्ढा खोदकर करीब एक दशक से पूजा करते आ रहे हैं।हर वर्ष तालाब की उड़ाहीकरण करने व जल संचय की मांग उठती है।लेकिन हर वर्ष लोगों को निराशा ही हाथ लगती है।


एक समय था जब यहां छठ पूजा होती थी, तब इस आयताकार तालाब के चारों तरफ सजे छठ डाला एक विहंगम दृश्य बिखेरता था। उस समय गांव के चारों तरफ से लोग रंग बिरंगी नए परिधानों में सजकर सिर पर पूजा की डाली लेकर घर से निकलते थे। दूर-दराज के लोग यहां छठ पूजा देखने आते थे।लेकिन अब स्थिति यह हो गया है कि करीब एक दशक से लोगों का लगाव इस तालाब से धीरे-धीरे टूटता चला गया।

अधिकतर लोग अब अपने-अपने घर पर ही गड्ढा खोदकर पूजा करने पर मजबूर हो गए हैं। अगर तालाब की सही तरीके से उड़ाहीकरण कर दिया जाए तो तालाब की पुरानी वजूद फिर से लौट सकता है।साथ ही तालाब में जल संचय होने से लोगों की परेशानी कम हो जाएगी।






