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समस्तीपुर। दवा दुकानों से आप दवा लेते हैं, लेकिन बिल नही लेते हैं, तो सावधान हो जाएं, ली गयी दवा नकली व अमान्य हो सकती है। जिससे मरीजों को फायदा के बदले नुकसान हो सकता है। इन दिनों जिले में बिना बिल के ही धड़ल्ले से दवा बेची जा रही है। वहीं बिल के नाम पर कुछ दुकानदार सादे कागज पर दवा का दाम जोड़कर ग्राहक को थमा देते हैं। ग्राहक भी पर्ची को दवा बिल मानकर घर लौट जाते हैं। लेकिन ऐसी पर्ची अमान्य है। जिसके कारण मरीज व उनके परिजन ऐसे दवा दुकानदारों के ठगी का शिकार भी होते हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए डीएम योगेंद्र सिंह ने औषधि विभाग को लगातार दवा दुकानों की जांच करने एवं दोषी दवा दुकानदारों के विरुद्ध कारवाई करने का निर्देश दिया है।

सहायक औषधि नियंत्रक नीलिमा कुमारी ने कहा कि हर हाल में हर दुकानदार को दवा बेचने के दौरान ग्राहक को बिल देना है। ग्राहक को बिल नहीं देने की शिकायत मिलने पर दोषी दुकानदार के विरुद्ध सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिल के लिए लोगों को भी जागरुक होने की जरुरत है। दवा खरीदने के बाद उन्हें बिल मांगना चाहिए। ताकि वे ठगी का शिकार नहीं हो सके।

बिल पर रहता है यह जानकारी दवा दुकानदारों के बिल की भी जांच ग्राहकों को करनी चाहिए। दुकानदार द्वारा दिए गए बिल पर दूकान का नाम, पता, मोबाइल नंबर के अलावे लाइसेंस नंबर, बिल नंबर, जीएसटी नंबर आदि अंकित रहता है। साथ ही दवा का नाम, दर भी अंकित करना है। ताकि ग्राहकों को पता चल सकें कि उन्होंने कौन सी दवा कितने में खरीदा है।

जिले में फिलहाल 14 सौ दवा दुकान लाइसेंसी है। इसमें एलोपैथिक दवा के थौक एवं खुदरा दुकान के अलावे होमियोपैथी, आयुर्वेदिक आदि प्रकार के दवा दुकान शामिल है। इन सभी दवा दुकानों को दवा बेचने के दौरान बिल देने का निर्देश दिया गया है।

इस कड़ी में पिछले महीने आधा दर्जन दवा दुकानों पर विभिन्न मामले में कारवाई भी की जा चुकी है। इसमें कई प्रकार के दवा के सेल पर रोक लगाने के साथ-साथ ही दुकानों का लाइसेंस भी निर्धारित समय के लिए निलंबित किया गया है। इसके बावजूद शहर से लेकर गांव तक दवा दुकानों में कोई बिल नहीं दिया जाता है। बिना बिल की दिए जाने वाली दवा नकली व अमान्य भी हो सकती है।






