समस्तीपुर। सदर अस्पताल में कार्यरत लगभग दो दर्जन दैनिक सफाई कर्मियों की नौकरी खतरे में आ गयी है। एक तरफ बिहार सरकार जहां रोजगार देने का दावा कर रही है है वही सरकार की नई नीति के कारण समस्तीपुर सदर अस्पताल में कार्यरत दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ गवानी पड़ेगी। इसको लेकर सफाई कर्मचारियों की स्थिति चरमरा गयी है। वहीं सफाई कर्मचारियों ने इसको लेकर डीएम, सीएस व डीएस से भी न्याय की गुहार लगाई है। सरकार की नयी नीति के कारण वर्षों से अस्पताल में एनजीओ के तहत कार्यरत सफाई कर्मी अपनी सेवा बरकरार रखने के लिए गोलबंद होने लगे हैं। उनका कहना है कि एजेंसी चाहे जो भी हो उनकी नौकरी रहनी चाहिए। अन्यथा आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में सफाई कर्मियों ने डीएम को आवेदन भी दिया है। उन्होंने आवेदन की प्रति सीएस व डीएस को भी दी है। डीएम को दिए आवेदन में उन्होंने कहा है कि पिछले 20 वर्षों से सदर अस्पताल में वे सफाई कार्य करते आ रहे हैं। सभी सफाई कर्मी महादलित परिवार के हैं। अब जानकारी दी गयी है कि जीविका द्वारा सफाई की पूरी व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान परिस्थिति में हम सभी सफाई कर्मी अन्य कार्य के लिए सक्षम भी नही हैं। सफाई कार्य नहीं मिलने के कारण परिवार के समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डीएम को दिए गए आवेदन में सफाई कर्मी मनोज कुमार, कंचन देवी, चंदा देवी, दिनेश राम, विनोद राम, दिनेश कुमार, शंकर राम, गोपी राम, बलदेव राम, भोला दास, विनोद दास, विमल देवी, राजेश राम, दीपक कमार, पिंकी देवी, अजीत राम, प्रकाश कुमार, सुरज कुमार, शिवम कुमार, मीरा देवी, रामबाबू राम, रीता देवी ने संयुक्त रुप से हस्ताक्षर किया है।दूरबीन। सरकार की नयी नीति के तहत आगामी एक अप्रैल से सदर अस्पताल के साफ-सफाई की व्यवस्था जीविका समूह को सौंपी जाएगी। जिसके बाद जीविका दीदियों द्वारा अस्पताल में सफाई एवं मरीजों को दी जाने वाली कपड़ों को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी। बता दें कि इससे पूर्व सदर अस्पताल में दीदी की रसोई भी जीविका समूह को दी गयी। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि एक अप्रैल से जीविका के द्वारा सफाई व्यवस्था होने की जानकारी मिली है। पहले से कार्यरत सफाई कर्मियों के बारे में उच्चाधिकारियों से परामर्श मांगी गयी है।







