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Doorbeen News Desk: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सात दिवसीय आवासीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा कल शाम में सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का आयोजन जुबिली हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अमन कुमार झा के विद्यापति रचित गोसावनी गीत से हुआ।
लक्ष्मी कुमारी ने मैथिली स्वागत गान एवं “ए पाहूना मिथिले मे रहुना…”, मो जमाल एवं दीपराज सिंह ने मां की ममता एवं कल्पना ने नारी शक्ति पर आधारित गीत गाया, राहुल कुमार ने सलहेस गीत पर लोकनृत्य, मुकेश कुमार ने देशभक्ति गीत- ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा…’, मन्ना कुमार ने मैथिली गीत- ‘हमर मनक गांव मे शोर भव गले…’, नमिता कुमारी ने ‘जो भेजी थी दुआ…’ राहुल कुमार ने ‘जागो तो एक बार जागो…’, शशि, दीपू, पंकज, सिन्टू, सूरज ने स्वागत गीत ‘किस तरह से करूं मैं नमन आपका…’, सोनी कुमारी ने एनएसएस प्रेरणा गीत- ‘कदम-कदम पर चलते जाए…’, शुभम सिंह ने राष्ट्रीय गीत, निधि कुमारी ने लोकगीत- ‘तोहार दुल्हा हो…’ पर नृत्य, जूली एवं प्रिया ने ‘देश रंगीला…’ पर नृत्य, शिवम झा, मधु कुमारी, सिमरन झा, रीतेश चन्द्र, साबिया, प्रियांशु, आकाश आदि ने प्रेरक कविता पाठ किया।


वहीं डेविड कुमार, रिमझिम, दीपू, सुरज, विशाखा, निशा, अंशु, राजनंदिनी, कल्पना, पल्लवी, सुशान्त, आदि ने देशभक्ति गान एवं नृत्य प्रस्तुत किया। शशि, पंकज, दीपू, सूरज एवं सिंटू ने मैथिली शिवनचारी- ‘तोरे सजनवा न हे गोरा….’ की बेहतरीन प्रस्तुति की। वहीं एसडीआरएफ टीम की ओर से राजू कुमार ने ‘भोले हो भोले…’, ‘तेरे चेहरे में जो जादू है वो…’ एनएसएस सहायक अमित कुमार झा ने देशभक्ति गीत ‘संदेशे आते हैं…’ तथा ‘ये रेशमी जुल्फें ये शरबती आंखें…’, आदि मनोरंजन एवं भावुक गीत प्रस्तुत किया। नमिता राय ने अच्छी मिमिक्री की, राहुल, सत्यम एवं शुभम ने बिहार लोक नृत्य प्रस्तुत किया, नवीन कुमार ने हास्य पद, रितेश ने गुड्डा-गुड़िया पर कविता, कन्हैया ने भगत सिंह का प्रेरक लेख पढ़ा।
संगीत संध्या का शुभारंभ करते हुए शिविर संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने संगीत की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह हमारे जीवन का अनिवार्य एवं महत्त्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें मानसिक शांति, भावात्मक अभिव्यक्ति, शारीरिक स्वास्थ्य एवं समाजिक जुड़वा प्रदान करता है। संगीत हमारे जीवन को अधिक सुखद, प्रेरणादायक एवं सामंजस्य पूर्ण बनाता है।


डॉ प्रियंका राय एवं अक्षय कुमार झा ने संयुक्त रूप से संचालन करते हुए कहा कि संगीत लोक जीवन, रीति- रिवाजों और सामाजिक परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। संगीत के माध्यम से अंतर्मन की गहरी भावनाएं सरलता से प्रकट की जा सकती हैं। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ शबनम कुमारी ने कहा कि संगीत मानवीय भावनाओं को सुर एवं ताल के रूप में व्यक्त करने का तरीका है। मधुर संगीत सुनने या गाने से मानसिक शांति एवं तनाव से मुक्ति मिलती है। यह ध्यान केंद्रित करने तथा याददाश्त बढ़ाने में भी सहायक होता है।


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