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समस्तीपुर| एक ओर भीषण गर्मी और लू के कारण जिले के स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं, वहीं दूसरी ओर तीन से छह वर्ष तक के मासूम बच्चे रोजाना आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचने को मजबूर हैं। तपती धूप, उमस और बढ़ते तापमान के बीच जिले के हजारों नौनिहाल सुबह सात बजे से ही केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। सवाल यह है कि जब बड़े बच्चों के लिए स्कूल बंद किए जा सकते हैं, तो आखिर आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों के लिए राहत क्यों नहीं?
जिले में इन दिनों तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। सुबह सात बजे से ही धूप चुभने लगती है। ऐसे में तीन से छह वर्ष के बच्चे केंद्रों तक पहुंचते हैं और सुबह 11 बजे तक वहीं रहते हैं। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में न तो बिजली की समुचित व्यवस्था है, न पंखे और न ही कूलर जैसी कोई सुविधा। ऐसे में मासूम बच्चों को गर्मी के बीच समय बिताना पड़ रहा है।
4934 केंद्रों में पहुंच रहे हजारों बच्चे
समस्तीपुर जिले में कुल 4934 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। सरकार के निर्देशानुसार इन केंद्रों का संचालन जारी है। गर्मी को देखते हुए समय में बदलाव जरूर किया गया है, लेकिन छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) सुनीता ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्मी की छुट्टी का प्रावधान नहीं है। हालांकि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए संचालन अवधि घटाकर सुबह 7 बजे से 11 बजे तक कर दी गई है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी को लेकर जिला प्रशासन से बातचीत कर उचित समाधान निकाला जाएगा।
अभिभावकों की चिंता: बच्चों को भेजने में लग रहा डर
कई अभिभावक अपने बच्चों को केंद्र भेजने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी गर्मी में छोटे बच्चों को घर से बाहर निकालना जोखिम भरा है। काशीपुर की एक महिला ने कहा, “बच्चा घर से निकलते ही पसीने से तर हो जाता है। डर लगता है कि कहीं बीमार न पड़ जाए।”
कई सेविकाओं का भी कहना है कि अभिभावक बच्चों को भेजने से मना कर रहे हैं। लेकिन सरकारी निर्देशों के कारण केंद्र बंद नहीं किए जा सकते। यदि बच्चों की संख्या कम होती है तो निरीक्षण के दौरान सवाल-जवाब का सामना करना पड़ता है।


आंगनबाड़ी संघ ने उठाए सवाल
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष किरण कुमारी ने कहा कि यह मासूम बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्कूलों में गर्मी की छुट्टी दी जा सकती है तो आंगनबाड़ी केंद्रों को इससे अलग क्यों रखा गया है?
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि केंद्र बंद नहीं किए जा सकते तो बच्चों को भोजन कराकर जल्दी छुट्टी दी जाए या फिर कोरोना काल की तरह सूखा राशन वितरण की व्यवस्था लागू की जाए।
बड़ा सवाल: क्या नौनिहालों पर गर्मी का असर नहीं होता?
भीषण गर्मी में जब बड़े-बड़े लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, तब तीन से छह साल के मासूम बच्चों का रोजाना केंद्र पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन और सरकार के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या इन नौनिहालों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए कोई विशेष व्यवस्था की जाएगी, या फिर वे यूं ही तपती गर्मी के बीच केंद्रों तक पहुंचने को मजबूर रहेंगे।


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