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Samastipur News: शिवाजीनगर मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत मई माह के दूसरे शनिवार को प्रखंड में सुरक्षित शनिवार का आयोजन पूरे उत्साह और जागरूकता के साथ किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य विषय गर्मी एवं लू के खतरे और उससे बचाव की जानकारी थी। जिसके अंतर्गत प्रखंड के सभी विद्यालयों में छात्रों को गर्मी के मौसम के दौरान सावधानियों और लू के चपेट में आने के बाद प्राथमिक उपचार के तरीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में लू के खतरे और उससे बचाव की जानकारी के प्रति चेतना जागृत करना और उन्हें आपातकालीन स्थिति में आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार करना था। गर्मी के मौसम में अक्सर बच्चे और आम लोग असावधानीवश लू के शिकार हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, इस जागरूकता अभियान के जरिए यह समझाया गया कि थोड़ी सी सतर्कता जान के जोखिम से बचा सकती है।


यह कार्यक्रम शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सभी विद्यालयों में आयोजित किया गया। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं, प्रधानाध्यापकों और नोडल शिक्षकों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को बताया गया कि गर्मी के मौसम में अधिक लू चलने पर घर से बाहर निकलने व बाहर खेलने से बचना चाहिए। कङी धूप में अनावश्यक सफर न करें और दूसरों को भी ऐसा करने से मना करें।
बच्चों को यह भी बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति गर्मी की चपेट में आकर लू का शिकार हो जाए तो प्राथमिक उपचार कैसे देना है, इसकी भी जानकारी दी गई। प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस तरह की स्थितियों में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि शांत रहकर त्वरित कार्रवाई करना जरूरी होता है। कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से में ‘क्या करें और क्या न करें’ पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया। शिक्षकों ने बताया कि गर्मी के मौसम में लू से बचाव के उपाय जैसे दोपहर में बाहर न निकलना, अधिक पानी पीना और सिर को ढककर रखना चाहिए।
यदि किसी छात्र को चक्कर आए या बुखार हो, तो तुरंत शिक्षक को सूचना देने की आदत विकसित की जाए। साथ ही बच्चों को प्राथमिक उपचार और ओआरएस घोल बनाने की विधि भी सिखाया गया। जिससे वे आपात स्थिति में सही निर्णय ले सकें। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना, स्वास्थ्य संबंधी सही आदतों का विकास करना, आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देना व सिखाना, जीवनोपयोगी कौशल विकसित करना यह क्यों उपयोगी है? बच्चों को लू और बीमारियों से बचाव की जानकारी मिलती है।


प्राथमिक उपचार की समझ विकसित होती है व आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है सुरक्षित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा मिलती है। लू की चपेट में आए व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के लिए निकटतम अस्पताल में ले जाएं। इस जागरूकता अभियान में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकगणों की सराहनीय भूमिका रही। इस दौरान पूर्व बीआरपी सह प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, एचएम सतनारायण आर्य, अरुण पासवान, सुभाष सिंह, संतोष कुमार, नीलू कुमारी, रामनाथ पंडित, हीरानंद झा, अवधेश चौधरी, प्रवीण कुमार, मो. अब्दुल्लाह, सरिता कुमारी, संजीत पोद्दार, दिलीप ठाकुर, मृत्युंजय सिंह, शांति भूषण, उमेश प्रसाद राय, बिहारी दास, देवानंद कामद, मृत्युंजय कुमार मिश्रा, अमित मिश्रा सहित अन्य प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक उपस्थित रहे। उन्होंने न केवल छात्रों को महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, बल्कि वास्तविक जीवन से जुड़ी घटनाओं के उदाहरण देकर बच्चों को सतर्क रहने की प्रेरणा भी दी।
सुरक्षित शनिवार के तहत चलाया गया यह जागरूकता अभियान बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालयों में इस तरह के प्रशिक्षण नियमित रूप से होते रहें, तो निश्चित रूप से बच्चों में आपदा से निपटने की समझ विकसित होगी और वे स्वयं के साथ-साथ दूसरों की भी मदद करने में सक्षम बनेंगे।


*हमारा बच्चा, हमारी जिम्मेदारी थीम पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित – Doorbeen News*
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