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Doorbeen News Desk: सावन मास की रिमझिम फुहार, ठंडी हवाओं और चारों ओर पसरी हरियाली के बीच शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत चल रहे पांच दिवसीय झूलनोत्सव का शुक्रवार को श्रद्धा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। रामजानकी रन्ना मठ सहित बंधार, बल्लीपुर, करियन, दसौत, लक्ष्मीनिया, बुनियादपुर, रामभद्रपुर समेत विभिन्न गांवों की ठाकुरबाड़ियों एवं मंदिर परिसरों में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही।
संध्या बेला में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मंदिर पहुंचे तथा भगवान श्री राधा-कृष्ण के झूलन दर्शन कर पूजा-अर्चना की। झूलनोत्सव के दौरान भगवान श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को फूल-पत्तियों एवं आकर्षक सजावटी सामग्री से सुसज्जित झूले पर विराजमान कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न होने के बाद भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भगवान को झूला झुलाया।


कई स्थानों पर प्रभु श्रीराम, माता सीता तथा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी विशेष रूप से सजाए गए झूले पर विराजमान कराया गया। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा। रामजानकी ठाकुरबाड़ी रन्ना मठ में पांचों दिनों तक शाम के समय विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर परिसर में ग्रामीणों का सामूहिक जुटान होता रहा। भजन-कीर्तन, कजरी, पारंपरिक झूला गीत सहित विभिन्न लोकधुनों की प्रस्तुति से वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा रहा। श्रद्धालु भक्ति गीतों में भाव-विभोर होकर भगवान के झूले का दर्शन करते और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते नजर आए। अंतिम दिन भी देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार रन्ना मठ में झूलनोत्सव की परंपरा करीब एक सौ वर्षों से चली आ रही है। पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा को ग्रामीण आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं। सावन मास में आयोजित होने वाले झूलन पर्व का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ लोक संस्कृति से भी गहरा जुड़ाव है। पारंपरिक गीत-संगीत और सामूहिक सहभागिता के कारण यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन रहा है।


पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन मास में भगवान श्रीकृष्ण अपनी प्रिय राधा एवं सखियों के साथ फूल-पत्तियों से सजे झूलों पर झूला करते थे। इसी पावन प्रसंग की स्मृति में झूलनोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
माना जाता है कि इस अवसर पर राधा-कृष्ण के झूलन दर्शन और पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। इसी विश्वास के कारण सावन में मंदिरों और ठाकुरबाड़ियों में झूलन कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहता है।
रन्ना मठ के महंत श्री श्री 1008 बाबा रामकृष्ण दास रामायणी जी महाराज ने कहा कि पांच दिवसीय झूलन महोत्सव का समापन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ।
उन्होंने बताया कि झूलनोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की वर्षों पुरानी परंपरा, लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। इस दौरान ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का सहयोग सराहनीय रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों में आध्यात्मिक चेतना बढ़ने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।


झूलनोत्सव के समापन के अवसर पर मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखा गया। पांच दिनों तक चले आयोजन में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन तथा पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होती रहीं। समापन के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सावन की हरियाली, लोकगीतों की मधुर धुन और भक्ति भाव से सराबोर वातावरण ने पूरे प्रखंड क्षेत्र को धार्मिक एवं सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में वर्षों पुरानी झूलन परंपरा एक बार फिर जीवंत दिखाई दी।

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