व्हाट्सएप से जुड़ने को क्लीक करें
Doorbeen News Desk: जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे हैं, रचाए सृष्टि को जिस प्रभु ने वही सृष्टि चला रहे हैं…भजन के साथ वर्तमान में समाज के दृश्य का चित्रण करते हुए गजल गायक के रुप में विख्यात धीरजकांत ने लोगों को खूब झुमाया।एक पर एक भजन के माध्यम से लोगों को खूब झुमाया।मौका था खानपुर प्रखंड के वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर रामनगर-रंजीतपुर गांव में आयोजित चैती नवरात्र का।
इस मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भजन के माध्यम से धीरजकांत ने प्रभु के लीलाओं को विस्तार से लोगों के बीच पेश किया। लोगों को जागरूक करते हुए उन्होंने द्रौपदी के चीरहरण के दौरान जब उन्हें पांच पति विवश दिखे, तब द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण से अपनी बचाव में गुजार लगाई।
गजल गायक ने हे गिरधारी, कृष्ण मुरारी लाज रखो मोरी, हे गिरधारी पांच पति सिर नीचे किए हैं….द्रौपदी द्वारा कही गई इस भजन के माध्यम से उन्होंने उल्लेख किया कि।जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, और उनके पांच पति भी कुछ नहीं कर पा रहे थे।जबकि एक अकेले शक्तिशाली भीम ही रक्षा के लिए काफी थे।
गजल गायक धीरजकांत ने आगे कहा कि।प्रभु तो सृष्टि बनाए हैं और सृष्टि चलाते हैं।उन्होंने एक भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर जन्मे हैं राम रघुरैया अवधपुर में बाजे बधाइयां….भजन गाकर भगवान के लीलाओं को बताया।जिसके बाद मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।इसके अलावे मुझे दास बनाकर रख लेना, भगवान तू अपने चरणों में…., मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे, राम आयेंगे…भजन ने श्रोताओं को खूब झुमाया।
वहीं भगवान श्री राम के वनवास जाते समय उन भावुक पलों को याद करते हुए वनवास जा रहे हैं, रघुवंश के दुलारे…भजन ने श्रुलताओं को भावुक कर दिया।उन्होंने कहा कि पिता की मर्यादा रखने के लिए भगवान श्री राम राज पाट को त्याग कर हंसते हुए वनवास को चले गए।

::गीत भीड़ आदमी का है, आदमी अकेला है…की प्रस्तुति देकर समाज का चित्रण कराया:-उन्होंने कहा जब एक बालक जन्म लेता है, तब उसे अपने-पराए का बोध नहीं होता है, हर किसी के गोद में खेलता है।लेकिन जब वह बड़ा होता है तब अपने ही उसे बीती बात बताते हैं, तुम्हारे चाचा ने मेरे साथ ये किया, फलाना भईया मुझे सताया था, ये कहकर बच्चे के अंदर दुश्मनी पैदा कर देते हैं।उसके अंदर नफरत की जहर घोल देते हैं।
उन्हें राम भजन के माध्यम से भगवान की लीलाओं को पेश करते हुए कहा की भगवान श्री राम हजारों कष्ट सहते हुए अपनों को प्यार ही देते रहे।उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए 14 वर्ष के लिए वनवास को चले गए।और राजपाट छोड़ दिए।लेकिन आज भाई-भाई के बीच चंद संपत्ति के लिए एक दूसरे के खून बहाने पर उतारू हो जाते हैं।त्याग और संतोष की भावनाएं विलुप्त होती जा रही है।

उन्होंने भगवान श्री राम के भक्त बाबा वीर हनुमान और भक्त सूरदास की भी कहानी का उल्लेख भजन के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध करते रहे।लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाले गजल के महा गायक धीरजकांत की एक-एक प्रस्तुति पर लोगों ने उनके मुख से निकले शब्दों को सराहते हुए रातभर संगीत की दुनिया मे खोए रहे।
इसके अलावे माता जगत जननी की भजन गाकर माता की शक्ति का उल्लेख किया।कार्यक्रम के व्यवस्थापक प्रभात मिश्रा ने बताया कि माता के दरबार में भजन के माध्यम से लोग रात भर भक्ति सागर में होता लगाते रहे।







