शक्ति की स्वरूप हैं कुंवारी कन्याएं, इनको भोजन कराने के बाद ही व्रत का मिलता है लाभ

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Doorbeen News Desk: शक्ति की अधिष्ठात्री माता दुर्गा की नवमी तिथि को माता की नवमी स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना के बाद मंदिरों व घरों में कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया गया।चैती नवरात्रि पर चारों तरफ भक्ति का रस दिख रहा है।कई लोग अपने-अपने घरों में भी कलश स्थापित कर माता की आराधना की।नवमी तिथि पर हवन कर भक्तगण पुण्य के भी भागी बने।घरों में भी लोगों ने कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर व्रत पूरा किए।बताया गया कि नवमी तिथि को पूजन के लिए श्रेष्ठ दिन माना गया है।

माता रानी का स्वरूप माने जाने वाली कन्याओं की पूजा के बिना नौ दिन की शक्ति पूजा अधूरी मानी जाती है।क्योंकि मां दुर्गा हवन, तप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होती हैं, जितनी कन्या पूजन से होती हैं।कुछ लोग उपवास के अंतिम दिन यानी नवमी तिथि को भी कन्या पूजन करने का संकल्प लेते हैं।

बताया गया कि कन्या के जन्म का एक वर्ष बीतने के पश्चात कन्या को कुंवारी की संज्ञा दी गई है।दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन को त्रिमूर्ति, चार को कल्याणी, पांच वर्ष को रोहिणी, छह को कालिका, सात को चंडिका, आठ वर्ष को शांभवी, नौ वर्ष को दुर्गा और दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा माना गया है।

नवरात्र में एक कन्या एक तरह की अव्यक्त ऊर्जा का प्रतीक होती है, और उनकी पूजा से यह ऊर्जा सक्रिय हो जाती हैं।

इनकी पूजा करने से सभी देवियों का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है।अष्टमी और नवमी व्रत कर भक्तों ने शुक्रवार को कुंवारी कन्याओं की पूजन और भोजन कराने के बाद स्वयं प्रसाद और अन्न ग्रहण किया।

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