व्हाट्सएप से जुड़ने को क्लीक करें
शिवाजीनगर पीएचसी में एनीमिया से पीड़ित गर्भवतियों को आयरन सुक्रोज का डोज
Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवाजीनगर में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की गई। एएनसी के दौरान एनीमिया से पीड़ित चिन्हित चार गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज का पहला डोज चढ़ाया गया। यह उपचार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार अमित की देखरेख में पूरी तरह सुरक्षित एवं चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया गया।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में खून की कमी एनीमिया को दूर करना तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में आयरन की कमी होना एक आम समस्या है, जिससे कई तरह की जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद जरूरी हो जाता है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार अमित ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आयरन सुक्रोज एक प्रभावी उपचार है, जिससे शरीर में आयरन की कमी तेजी से पूरी होती है और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है। साथ ही इससे गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने आगे बताया कि पीएचसी स्तर पर इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं से नियमित जांच कराने और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार दवा लेने की अपील की।
इस दौरान मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने भी गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, हरी सब्जियां, फल एवं आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने तथा समय समय पर जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि नियमित जांच से किसी भी समस्या की समय रहते पहचान कर उसका उपचार संभव हो पाता है।

मौके पर डॉ. विवेक कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक अमानुल्ला, पिरामल प्रतिनिधि, स्टाफ नर्स सुमन कुमारी, एएनएम सबिता कुमारी, यूनिसेफ बीसीएम विक्रम कुमार चौधरी, एवं आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को काफी लाभ मिलेगा और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम साबित होगा।






