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पीजी की 18 हजार सीटें खाली रह जाने पर फैसलाशून्य पर्सेंटाइल पर भी मेडिकल पीजी
Doorbeen News Desk: मेडिकल सीटों के लिए वैसे तो मारामारीर हती है, लेकिन इस साल मेडिकल की पीजी सीटों को भर पाना मुश्किल हो रहा है। दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद भी पीजी की करीब 18 हजार सीटें खाली हैं। सरकार को सीटों के नहीं भर पाने की आशंका है। इस वजह से नीट पीजी का कटऑफ घटाकर शून्य पर्सेंटाइल तक करने का फैसला लिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सीटों के नहीं भर पाने के कारण प्रवेश के लिए नीट पीजी की 50 फीसदी पर्सेन्टाइल की अर्हता को घटाकर सात पर्सेन्टाइल कर दिया गया है, जबकि आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे 40 से घटाकर शून्य पर्सेन्टाइल कर दिया गया है।
बता दें कि पिछले कई वर्षों से सरकारी और निजी मेडिकल कालेजों में पीजी में सीटें खाली रह जा रही हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी की थी और सरकार से कहा था कि सीटें खाली नहीं जानी चाहिए। हालांकि, पहले इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली नहीं रहती थीं।

80 हजार से अधिक सीटें: सूत्रों के अनुसार सीटों के खाली रहने की पीछे कई वजहें हो सकती हैं। पहली बात यह है कि नीट पीजी की सीटें 80 हजार से अधिक हो चुकी हैं, जो जरूरत से ज्यादा हैं। दूसरा, पीजी में कई ऐसे विषय हैं, जिन्हें उम्मीदवार नहीं लेना चाहते हैं जैसे एनाटामी, फिजियोलॉजी, बायो केमिस्ट्री आदि। इनकी ज्यादातर सीटें खाली रह जाती हैं।

अधिक फीस होना भी वजह: निजी कॉलेजों में फीस ज्यादा होना, मैनेजमेंट कोटे में ज्यादा डोनेशनल की मांग करना, छात्रों का विदेश में अध्ययन को तरजीह देना भी सीटें खाली रह जाने का कारण है। सूत्रों ने बताया कि संशोधन का उद्देश्य उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है, जो चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।






