स्तनपान केवल पोषण नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास में भी सहायक : डीपीओ

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स्तनपान केवल पोषण नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास में भी सहायक : डीपीओ

दूरबीन न्यूज डेस्क। विश्व स्तनपान सप्ताह उपलक्ष्य में समस्तीपुर प्रवीण कुमार आईसीडीएस द्वारा आंगनवाड़ी केन्दों पर कार्यक्रम किया जा रहा है। आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्तनपान का महत्व बताया जाता है। स्तनपान से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। जीरो से 6 माह के बच्चे को मां के दूध के अलावा और कुछ नहीं देना है, ताकि बच्चे स्वस्थ रहे। उन्होंने बताया कि वैसे तो स्तनपान सप्ताह 1 जुलाई से 7 जुलाई तक मनाया जाता है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर माता को जागरूक किया जाता है और इनके फायदे भी बताए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 4945 आंगनबाड़ी केदो पर विश्व स्तनपान दिवस मनाया  जाता है।

आईसीडीएस की डीपीओ सुनीता ने बताया कि ‘माँ का दूध शिशु के लिए अमृत तुल्य है। मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा में ‘गया और माया का दूध’ अमृत के रूप में वर्णित है। यह न केवल पोषण बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास में भी सहायक होता है।’ स्तनपान केवल एक पोषण प्रक्रिया नहीं, बल्कि मातृत्व और स्वास्थ्य का मूल अधिकार है। इसके प्रति समाज में व्यापक जागरूकता फैलाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

डीपीओ ने बताया कि स्तनपान के दौरान स्वच्छता और संक्रमण से बचाव अत्यंत आवश्यक है। जैसे बछड़ा केवल अपनी माँ का दूध पीता है, वैसे ही नवजात के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम पोषण है। बच्चे को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराना आवश्यक है, जिससे शिशु को कोलोस्ट्रम (पहला दूध) मिल सके जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

:स्तनपान की प्रमुख विशेषताएं:-स्तनपान का महत्व: माँ का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार है – इसमें वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो पहले छह महीनों में शिशु को चाहिए। स्वास्थ्य लाभ: स्तनपान न केवल शिशु को संक्रमण, डायरिया, निमोनिया जैसी बीमारियों से बचाता है, बल्कि माँ को भी स्तन व गर्भाशय के कैंसर से सुरक्षा देता है।अनुशंसित अवधि: डव्लूएचओ के अनुसार जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराना चाहिए और कम से कम दो वर्ष तक इसे जारी रखना चाहिए।