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अस्पतालों की निगरानी 23 हजार कैमरों से होगी, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का लिया जाएगा सहयोग
दूरबीन न्यूज डेस्क। सरकारी अस्पतालों की निगरानी 23 हजार 120 कैमरे से होगी। जिला अस्पतालों में 1728, अनुमंडलीय अस्पतालों में 2160, सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 1923 कैमरे लगाए जाएंगे। विधान परिषद में बजट सत्र के दौरान मंगलवार को राजद सदस्य डॉ. उर्मिला ठाकुर के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यह यह जानकारी दी।
राजद सदस्य ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स की लापरवाही, मरीजों के इलाज में दिक्कत को लेकर प्रश्न किया था। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी अस्पतालों की निगरानी मुख्यालय द्वारा की जा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 19219 कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे रोगियों एवं चिकित्सकों और स्थलों की सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे हैं।


नौ जिला अस्पतालों में ब्लड सेपरेशन यूनिट लगेगी राज्य के नौ जिला अस्पतालों में ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित की जाएगी। इसमें बक्सर, सीवान, गोपालगंज, औरंगाबाद, मधुबनी, सीतामढ़ी, किशनगंज, सारण, सहरसा, प. चंपारण शामिल हैं। विधानपरिषद में मंगलवार को जदयू एमएलसी राधाचरण साह के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना वहीं होती है, जहां 2000 यूनिट से अधिक रक्त संग्रह होता है। आरा सदर अस्पताल में इससे कम रक्त संग्रह होता है।


विप की पहली पाली में प्रो. राजवर्धन आजाद ने बिहार में एचआईवी ग्रसित मरीजों के इलाज के संबंध में सरकार से सवाल किया। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2022-23 से 2024-25 तक 3 वर्ष में 14 हजार 226 एचआईवी मरीजों को चिन्हित किया गया है। 2022-23 में 5164, 2023-24 में 5046 और 2024 से जनवरी 2025 तक 4016 मरीज मिले हैं। मरीजों का मुफ्त जांच के साथ जांच किट भी उपलब्ध करायी जाएगी। बताया कि सुधार गृहों में निशुल्क एचआईवी जांच की जाती है।


राजेंद्र नगर नेत्र अस्पताल में 72 में से 44 पद खाली हैं। ये जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने डॉ. उर्मिला ठाकुर के प्रश्न के जवाब में दी। कहा कि चिकित्सकों के 20 और अन्य के 52 पदों का सृजन किया गया है। इस समय 7 चिकित्सक और 15 जीएनएम कार्यरत हैं। 6 नेत्र चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। अस्पताल में अब तक 4381 बड़ी सर्जरी हुई है। इस पर जदयू एमएलसी राजवर्द्धन आजाद ने सरकार से आग्रह किया कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की पहचान ऑपरेशन की संख्या से नहीं होनी चाहिए, यह ध्यान रखा जाए।


ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत बगैर डिग्री के चिकित्सकों को एनआईओएस से प्रशिक्षित किया गया है। इनका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने विधानपरिषद में भाकपा माले एमएलसी शशि यादव द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। शशि यादव ने सरकार से प्रश्न किया कि ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों ने कोरोना काल में लोगों की सहायता की। इनको पीएचसी से जोड़ा जाए। इसके जवाब में मंगल पांडेय ने कहा कि करोना काल में ग्रामीण चिकित्सकों को प्रति मरीज 200 रुपये दिए जाते थे। इसके साथ ही टीबी मरीजों की पहचान के बदले 500 रुपए दिए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सक के पास डिग्री नहीं है। ऐसे में वह डॉक्टर नहीं हैं। उनको प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है।





