जल संकट : चिंता सूबे में 2050 तक 37 फीसदी घट जाएगी जल की उपलब्धता

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जल संकट : चिंता सूबे में 2050 तक 37 फीसदी घट जाएगी जल की उपलब्धता

दूरबीन न्यूज डेस्क। बिहार में वर्ष 2050 तक प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता मात्र 635 घनमीटर रह जाएगी। अर्थात अगले 25 वर्ष में जल उपलब्धता करीब 37 फीसदी कम हो जाएगी। अभी वर्ष 2025 में बिहार में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1006 घनमीटर है। आईआईटी पटना के अध्ययन में यह बात सामने आई है।इस रिपोर्ट के आधार पर जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में कहा है कि बिहार जल संकट के दरवाजे पर खड़ा है। मंत्री मंगलवार को विधानसभा में विभागीय बजट पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। मंत्री ने सदन में जल संसाधन विभाग का 7451.1499 करोड़ का बजट पेश किया।

श्री चौधरी ने कहा कि आजादी के समय बिहार में जल की उपलब्धता 5000 घन मीटर से अधिक थी। इस प्रकार 100 वर्षों में बिहार में जल की उपलब्धता में लगभग 90 फीसदी की कमी आ जाएगी। जल की उपलब्धता में लगातार कमी खतरनाक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जल-जीवन-हरियाली के कारण बिहार ने जल संकट को दूर करने में जुटा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इसके कारण बीते साल बिहार में भूजल का क्षेत्र 929 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ा है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ के समय नदियों के अधिशेष जल को सूखाग्रस्त और जल संकट वाले इलाकों में भेजने की योजना पर काम कर रही है। विभाग ने बाढ़ के पानी को पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग करने की योजना बनायी है।

इससे भी राज्य का जल संकट दूर होगा। यही नहीं, नदियों के पानी की बर्बादी भी रुकेगी। बाढ़ के समय नदियों का पानी बंगाल की खाड़ी में जाकर व्यर्थ हो जाता है।

तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र से मांगी मदद मंत्री ने कहा कि विभाग ने प्रमुख नदियों के तटबंधों को ऊंचा करने और उन्हें सुदृढ़ करने की योजना बनायी है। इसके लिए केन्द्र सरकार से मदद भी मांगी है। केन्द्र सरकार ने सहयोग का आश्वासन दिया है। बीते साल बिहार में रिकॉर्ड बाढ़ आई। सभी प्रमुख नदियों ने जलस्तर का रिकॉर्ड बनाया।

यही नहीं, कोसी, बागमती, गंडक, कमला बलान जैसी नदियों का पानी उनके तटबंध के ऊपर तक पहुंच गया। इसके पहले विपक्षी विधायकों ने मंत्री पर उनके द्वारा उठाये सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया। विपक्षी विधायकों ने वेल में आकर विरोध में नारेबाजी भी की और सदन से वाकआउट किया। उनकी गैरमौजूदगी में ही सदन ने जल संसाधन विभाग के बजट पर अपनी सहमति प्रदान की।