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समस्तीपुर। समस्तीपुर सदर अस्पताल के ब्लड बैंक को ब्लड की जरुरत है। यूं कहें तो ब्लड बैंक में ब्लड भंडारण की संख्या नगण्य है। जिसके कारण आने वाले मरीजों को भी परेशानी होती है। खासकर थैलेसिमिया के मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में पिछले एक सप्ताह से ब्लड की समस्या बनी हुई है। कभी पांच तो कभी दो यूनिट ब्लड ही उपलब्ध होता है। कभी उस ब्लड ग्रुप का कोई एक साथ कई थैलेसिमिया के मरीज पहुंचने पर वो भी खाली हो जाता है।


फिलहाल ब्लड बैंक में मात्र दो यूनिट ही ब्लड का स्टॉक है। 15 दिसंबर को ब्लड बैंक में मात्र दो यूनिट ब्लड शेष था। ब्लड बैंक के प्रदर्शित बोर्ड पर ए पॉजिटिव एवं एबी पॉजिटिव ही ब्लड है। ब्लड बैंक के बाहर लगे बोर्ड पर प्रत्येक दिन उपलब्ध ब्लड की जानकारी प्रदर्शित की जाती है। ताकि लोगों को इसकी जानकारी मिल सकें। ब्लड बैंक में ए निगेटिव, बी पॉजेटिव, बी निगेटिव, एबी निगेटिव, ओ पॉजेटिव, ओ निगेटिव यूनिट का एक भी ब्लड नहीं है। ऐसे ग्रुप के मरीज को डोनर साथ होने की स्थिति में भी ब्लड नहीं मिल पाता है।

निगेटिव ग्रुप के ब्लड की हमेशा कमी होती है। ऐसे डोनर की संख्या भी कम है। हालांकि ऐसे निगेटिव ग्रुप के लोगों की संख्या अधिक है, लेकिन रक्तदान करने वाले की संख्या कम है। ऐसी स्थिति में निगेटिव ग्रुप के ब्लड की संख्या हमेशा कम होती है। बतादें कि शनिवार की सुबह कनकनाती ठंड में परिजन थैलेसिमिया के मरीज को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन ब्लड नहीं होने की स्थिति में उन्हें बैरंग लौटा दिया गया है। मरीज के परिजन ने बताया कि उन्हें ओ पॉजेटिव ग्रुप की आवश्यकता है।

उनका बच्चा थैलेसिमिया से ग्रसित है। हालांकि ब्लड बैंक कर्मी ने रविवार को ब्लड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि ब्लड कैंप आयोजित हो रहा है। ब्लड मिल जाएगा। थैलेसिमिया व कैंसर रोगी के मरीज को नि:शुल्क ब्लड दिया जाता है। ऐसे मरीजों से ना तो डोनर की डिमांड की जाती है और ना ही कोई प्रोसेसिंग शुल्क ही देना होता है। इसके बावजूद सरकार के द्वारा ऐसे मरीज को नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जाता है।

साथ ही ऐसे मरीजों के परिजनों को समाज केलोगों में ब्लड डोनेशन के प्रति जागरुक करने की भी जवाब देही दी गयी है। ताकि समय आने पर ऐसे मरीजों को ब्लड मिल सकें। जिले में लगभग चार दर्जन से अधिक थैलेसिमिया के मरीज हैं, जिन्हें कुछ दिनों के अंतराल पर ब्लड चढ़ाया जाता है।
‘फिलहाल शिक्षकों के ट्रेनिंग सेंटर पर जाकर कैंप लगाया जा रहा है। कुछ शिक्षकों के द्वारा ब्लड डोनेशन किया भी गया है। लोगों से रक्तदान करने की अपील भी की जा रही है। ताकि जरुरतमंद को ब्लड मिल सकें।’
– डॉ गिरीश कुमार, नोडल अधिकारी, ब्लड बैंक







