विभूतिपुर सीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक के विरुद्ध एएनएम ने किया प्रदर्शन, लगाया मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप

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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले का स्वास्थ्य विभाग आए दिन किसी न किसी कारण से चर्चा में रहता है। कभी डॉक्टर और कर्मचारियों के बीच तो कभी अस्पताल प्रबंधक व कर्मचारी के बीच किसी न किसी बात को लेकर चर्चा होती रहती है। साथ ही इसको लेकर एक दूसरे का विरोध लगातार होता है। जिसका असर स्वास्थ्य सेवा पर भी दिखता है। ताजा मामला विभूतिपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां स्वास्थ्य प्रबंधक के विरुद्ध एएनएम ने प्रदर्शन किया। साथ ही स्वास्थ्य प्रबंधक पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगा दिया।

विभूतिपुर प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एएनएम ने स्वास्थ्य प्रबंधक पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए रविवार को सीएचसी पर प्रदर्शन किया। इसके बाद एएनएम कुमारी सुलेखा सिंह, प्रेमकला कुमारी, रंजू कुमारी, चंद्रमाला कुमारी, अंजनी कुमारी, शोभा कुमारी, अंजू कुमारी आदि ने हस्ताक्षरित एक आवेदन सिविल सर्जन, सीएचसी प्रभारी को दिया है। जिसमें बताया गया कि एएनएम विगत दो वर्षों से पल्स पोलियो अभियान कार्यक्रम में कार्य नहीं करती हैं। क्योंकि विभूतिपुर में आशा कार्यकर्ता के द्वारा ही पल्स पोलियो का कार्य किया जा रहा है।

एएनएम की मानें तो दिसंबर 2023 पल्स पोलियो कार्यक्रम शुरू होने से 10 घंटे पहले प्रशिक्षण दिया गया। लेकिन उस समय ड्यूटी के संबंध में कुछ नहीं बताया गया। गत 9 दिसंबर की रात्रि सभी एएनएम के व्हाट्सएप ग्रुप पर माइक्रो प्लान डाल दिया गया। इतने कम समय एवं अन्य कारणो से एएनएम मानसिक रूप से पल्स पोलियो कार्यक्रम के लिए तैयार नहीं हुई। एएनएम के द्वारा बताया गया कि हम लोगों को सही समय पर एमसीडी फॉर्म नहीं मिलता है। बीएचएम के द्वारा कोई भी कार्यक्रम का रिस्पांस नहीं लिया जाता है।

कई काम इंटरनेट के द्वारा मोबाइल ऐप से किया जाता है लेकिन उसका भी भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।एनसीडी का राशि अप्रैल 2023 से अभी तक का भुगतान नहीं किया गया है। बार-बार मीटिंग में बीएचएम के द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। वही दूसरी ओर प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक रंजीत प्रसाद द्वारा बताया गया कि एएनएम को पल्स पोलियो जैसे महत्वपूर्ण कार्य मे लगाया गया था जिसका ये लोग विरोध कर रही थी। बस इतनी सी ही बात है और कुछ नहीं। ड्यूटी नही करने के बजाए झूूूठा आरोप लगाया जाता है।

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