नई दिल्ली। जी-20 शिखर सम्मेलन में शनिवार को भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की घोषणा की गई। इससे वैश्विक बुनियादी ढांचे, निवेश के लिए साझेदारी, आवाजाही और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि इतने बड़े कदम के साथ हम भविष्य के विकास के लिए बीज बो रहे हैं। उन्होंने कहा, भारत आवाजाही को क्षेत्रीय सीमाओं तक नहीं बांधता। यह गलियारा आपसी विश्वास को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।


उन्होंने कहा, भारत ने हमेशा इस पर जोर दिया कि मजबूत कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा मानवता के लिए बुनियादी आधार है। हम एक विकसित भारत के लिए एक मजबूत नींव रख रहे हैं। पीजीआईआई (वैश्विक बुनियादी ढांचे और निवेश के लिए साझेदारी) के जरिए ग्लोबल साउथ देशों में बुनियादी ढांचे का अंतर भरने में हम बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।


फैसले की सराहना अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि गलियारे के प्रमुख हिस्से के रूप में हम जहाजों और रेलगाड़ियों में निवेश कर रहे हैं, जो भारत से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के माध्यम से यूरोप तक विस्तारित है। इससे व्यापार करना आसान होगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, यह ऐतिहासिक फैसला है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा, यह पहले वैश्विक हरित व्यापार मार्ग से संबंधित है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकॉनमी कॉरिडोर ऐतिहासिक है। इससे व्यापार में मजबूती आएगी। इससे यात्रा 40 प्रतिशत तेज हो जाएगी।







